नई दिल्ली : भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम 5 जुलाई से 14 जुलाई तक यूनाइटेड किंगडम के दौरे पर रहेगी। इस दौरान टीम कुल सात मुकाबले खेलेगी। इन मैचों में स्कॉटलैंड की सीनियर महिला टीम, इंग्लैंड अंडर-21, अमेरिका अंडर-21 और बेल्जियम अंडर-21 जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ मुकाबले शामिल हैं।
यह दौरा ऑस्ट्रेलिया के नव नियुक्त मुख्य कोच टिम व्हाइट के मार्गदर्शन में भारतीय जूनियर महिला टीम का पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय असाइनमेंट होगा। टीम प्रबंधन इसे आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रहा है।
दौरे की शुरुआत स्कॉटलैंड की राजधानी एडिनबर्ग से होगी। भारतीय टीम 5 और 6 जुलाई को यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग के पेफरमिल प्लेइंग फील्ड्स में स्कॉटलैंड की सीनियर महिला टीम के खिलाफ दो मुकाबले खेलेगी।
इसके बाद भारतीय टीम इंग्लैंड के लिलेशॉल शहर जाएगी, जहां लिलेशॉल नेशनल स्पोर्ट्स सेंटर में शेष पांच मैच आयोजित किए जाएंगे।
भारतीय टीम 8 और 11 जुलाई को संयुक्त राज्य अमेरिका अंडर-21 टीम से भिड़ेगी। वहीं 9 और 12 जुलाई को उसका सामना इंग्लैंड अंडर-21 टीम से होगा। दौरे का अंतिम मुकाबला 14 जुलाई को बेल्जियम अंडर-21 टीम के खिलाफ खेला जाएगा, जिसके साथ यह अंतरराष्ट्रीय अभियान समाप्त होगा।
दौरे को लेकर मुख्य कोच टिम व्हाइट ने कहा कि यह खिलाड़ियों के लिए उच्च स्तर की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का अनुभव प्राप्त करने का शानदार अवसर है। उनके अनुसार विभिन्न देशों की टीमों के खिलाफ खेलने से खिलाड़ियों को हॉकी की अलग-अलग शैलियों को समझने और अपने खेल को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
टिम व्हाइट ने कहा कि यह दौरा हमारे खिलाड़ियों को मजबूत अंतरराष्ट्रीय प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ खेलने और हॉकी की विभिन्न शैलियों का अनुभव प्राप्त करने का बहुमूल्य अवसर प्रदान करेगा। विश्वस्तरीय जूनियर कार्यक्रमों और स्कॉटलैंड की सीनियर टीम के खिलाफ मुकाबले सीखने और विकास के लिए उत्कृष्ट मंच साबित होंगे। इस तरह के विदेशी दौरे युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढलने, आत्मविश्वास बढ़ाने और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में खेल की बेहतर समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मुख्य कोच ने यह भी कहा कि यह दौरा युवा खिलाड़ियों को भविष्य में सीनियर राष्ट्रीय टीम तक पहुंचने की दिशा में तैयार करने में मदद करेगा। उनके अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार प्रतिस्पर्धा करने से खिलाड़ियों का विकास तेज होता है और वे उच्च स्तर की हॉकी के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो पाते हैं।