दार्जिलिंगः बंगाल की पहाड़ी राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। गोर्खा प्रजातांत्रिक मोर्चा के प्रमुख अनीत थापा ने गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) के प्रमुख और सभासद पद से हटने की घोषणा कर दी है। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में जनता ने जिस राजनीतिक निर्णय को चुना है, उसका सम्मान करते हुए उन्होंने यह कदम उठाया है।
सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में अनीत थापा ने कहा कि राज्य की जनता ने भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में मतदान किया है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनादेश सर्वोपरि होता है और उसी का सम्मान करते हुए वह जीटीए प्रमुख और सभासद पद की जिम्मेदारी छोड़ रहे हैं।
अनीत थापा का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब हालिया विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को दार्जिलिंग और कर्सियांग क्षेत्र में अपेक्षित सफलता नहीं मिली। चुनाव में गोर्खा प्रजातांत्रिक मोर्चा ने तृणमूल कांग्रेस के साथ गठबंधन कर मैदान में उतरने का फैसला किया था और दोनों पहाड़ी क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारे थे।
हालांकि चुनाव परिणाम भाजपा के पक्ष में गए और दार्जिलिंग तथा कर्सियांग की सभी सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की। इसके बाद से ही पहाड़ की राजनीति में नए समीकरणों और नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा रही कि राज्य में भाजपा के सत्ता में आने के बाद जीटीए को लेकर प्रशासनिक स्तर पर दूरी दिखाई देने लगी थी। हाल में मुख्यमंत्री द्वारा सिलीगुड़ी में आयोजित प्रशासनिक बैठक में जीटीए के किसी निर्वाचित प्रतिनिधि को आमंत्रित नहीं किया गया था। इस घटनाक्रम को लेकर पहाड़ की राजनीति में असहजता की चर्चाएं शुरू हो गई थीं।
इसी पृष्ठभूमि में अनीत थापा का इस्तीफा एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह कदम पहाड़ की राजनीति में आने वाले समय के बदलावों की दिशा तय कर सकता है।
अनीत थापा के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए जीएनएलएफ प्रमुख मन घीसिंग ने कहा कि जब जनता का फैसला स्वीकार कर लिया गया है, तो केवल प्रमुख पद ही नहीं, बल्कि सभी सभासदों को भी अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने इसे जनादेश के प्रति सम्मान का स्वाभाविक कदम बताया।
अनीत थापा के निर्णय के बाद अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जीटीए के भीतर आगे क्या राजनीतिक और प्रशासनिक बदलाव होते हैं। उत्तर बंगाल के पहाड़ी क्षेत्रों में यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में राजनीतिक गतिविधियों को और तेज कर सकता है।