जगद्दलः उत्तर 24 परगना के जगद्दल स्थित एलायंस जूट मिल में बुधवार की सुबह कई श्रमिकों के लिए किसी त्योहार से कम नहीं थी। महीनों से बंद पड़े मिल के गेट खुलते ही परिसर में खुशी का माहौल बन गया। श्रमिकों ने एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाईं, फूलमालाएं पहनाईं और नारे लगाकर अपनी खुशी जाहिर की। लंबे समय बाद काम पर लौटने की उम्मीद ने हजारों परिवारों के चेहरों पर मुस्कान ला दी।
छह महीने की बेरोजगारी ने बढ़ाई थी मुश्किलें
26 दिसंबर 2025 से मिल में उत्पादन बंद था। इसके चलते स्थायी और ठेका श्रमिकों समेत करीब 2500 लोग सीधे प्रभावित हुए थे। कई परिवारों की आय का एकमात्र स्रोत बंद हो गया था। एक वरिष्ठ श्रमिक ने भावुक होकर बताया कि मिल बंद होने के बाद बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना कठिन हो गया था। उनका कहना था कि आज मिल का दोबारा खुलना उनके लिए नई जिंदगी मिलने जैसा है।
महिला श्रमिकों और युवा कर्मचारियों ने भी राहत व्यक्त करते हुए कहा कि रोजगार की वापसी ने भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता को काफी हद तक कम कर दिया है।
बैठक में बनी सहमति, फिर खुला रास्ता
मिल को फिर से चालू करने का रास्ता मंगलवार को कोलकाता के न्यू सेक्रेटेरिएट में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में साफ हुआ। श्रम मंत्री अर्जुन सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में उपमंत्री भास्कर भट्टाचार्य, विशेष श्रम आयुक्त आशीष सरकार, मिल मालिक, प्रबंधन और विभिन्न श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
कई दौर की चर्चा के बाद सभी पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि 17 जून से मिल में उत्पादन दोबारा शुरू किया जाएगा। इसी निर्णय के बाद बुधवार से मिल ने पूरी क्षमता के साथ कामकाज शुरू कर दिया।
जूट उद्योग को फिर खड़ा करने की तैयारी
बैठक के बाद श्रम मंत्री अर्जुन सिंह ने कहा कि जूट उद्योग लंबे समय से कई समस्याओं से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि उद्योग में पर्याप्त आधुनिकीकरण नहीं होने, कच्चे जूट की कमी और अन्य कारणों से कई मिलों की स्थिति कमजोर हो गई थी।
उन्होंने भरोसा जताया कि केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से जूट उद्योग को फिर से मजबूती देने की दिशा में काम किया जाएगा। उनके अनुसार, उद्योग को पुनर्जीवित करना केवल आर्थिक जरूरत नहीं बल्कि लाखों परिवारों की आजीविका से जुड़ा मुद्दा है।
बैरकपुर जूट बेल्ट के लिए राहत की खबर
अर्जुन सिंह लंबे समय से बैरकपुर जूट बेल्ट से जुड़े रहे हैं और जूट उद्योग के मुद्दों को प्रमुखता से उठाते रहे हैं। एलायंस जूट मिल के दोबारा खुलने को बैरकपुर क्षेत्र के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलने की उम्मीद है।
क्यों संकट में आया जूट उद्योग?
पश्चिम बंगाल देश के जूट उद्योग का सबसे बड़ा केंद्र है। राज्य में 70 से अधिक जूट मिलें हैं, जिनमें से अधिकांश उत्तर 24 परगना, हुगली और हावड़ा जिलों में स्थित हैं। इसके बावजूद उद्योग पिछले कुछ वर्षों से कई चुनौतियों का सामना कर रहा है।
कच्चे जूट की कमी, बढ़ती लागत, पुरानी मशीनें और बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने कई मिलों को प्रभावित किया। जगद्दल, एम्पायर, प्रबर्तक और अन्य कई मिलें इसी संकट से गुजरती रही हैं।
हजारों परिवारों की आजीविका दांव पर
जून 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राज्य की लगभग 10 प्रमुख जूट मिलें पूरी तरह बंद थीं। इनके बंद होने से 20 हजार से अधिक श्रमिक सीधे प्रभावित हुए।
इसके अलावा करीब 75 हजार श्रमिक आंशिक बेरोजगारी या कम आय की समस्या से जूझ रहे थे। राज्य में लगभग 3 लाख लोगों की प्रत्यक्ष और 35 लाख लोगों की अप्रत्यक्ष आजीविका जूट उद्योग पर निर्भर है। यही कारण है कि किसी एक मिल का खुलना भी हजारों परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।
अब अन्य बंद मिलों पर सरकार की नजर
एलायंस जूट मिल के दोबारा शुरू होने के बाद सरकार ने संकेत दिया है कि यह केवल शुरुआत है। श्रम विभाग को अन्य बंद मिलों के लिए भी रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार का लक्ष्य चरणबद्ध तरीके से करीब 10 बंद जूट मिलों को फिर से चालू करना है, जिससे 20 हजार से अधिक लोगों को रोजगार वापस मिल सके। इसके लिए आधुनिकीकरण, कच्चे माल की बेहतर आपूर्ति, निर्यात को बढ़ावा और केंद्र सरकार के साथ समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
श्रमिकों की उम्मीदें अब और बढ़ीं
मिल खुलने से श्रमिकों में उत्साह जरूर है, लेकिन उनकी अपेक्षाएं भी स्पष्ट हैं। वे चाहते हैं कि नियमित वेतन, समय पर बोनस, सुरक्षित कार्य वातावरण और उत्पादन की निरंतरता सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में फिर ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।
एलायंस जूट मिल का दोबारा खुलना केवल एक औद्योगिक इकाई के संचालन की बहाली नहीं है। यह उन हजारों परिवारों की उम्मीदों की वापसी है, जिन्होंने पिछले छह महीनों में आर्थिक संकट और अनिश्चितता का सामना किया। जगद्दल और पूरे बैरकपुर जूट बेल्ट के लिए यह दिन राहत, विश्वास और नई संभावनाओं का संदेश लेकर आया है।