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उत्तर प्रदेश में सियासी भूचाल का दावा, ओम प्रकाश राजभर बोले— समाजवादी पार्टी में बड़ा विभाजन तय

एसपी में टूट की आशंका, मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कई नेताओं के बीजेपी में जाने का किया दावा

By प्रियंका महतो

Jun 17, 2026 17:51 IST

लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाजी देखने को मिली है। राज्य के मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया है कि समाजवादी पार्टी (एसपी) में जल्द ही बड़ा विभाजन हो सकता है और पार्टी के कई नेता भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के लिए तैयार हैं।

लखनऊ से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम में ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट करते हुए यह भी दावा किया कि समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र सौंपा है। हालांकि उन्होंने इस कथित पत्राचार से जुड़ी कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की।

राज्य मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने आगे आरोप लगाया कि विभिन्न मामलों की जांच ने समाजवादी पार्टी पर दबाव बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में खनन घोटाले और गोमती रिवर फ्रंट घोटाले के पीछे कौन है, यह पूरा प्रदेश जानता है। उन्होंने दावा किया कि जैसे-जैसे जांच की घेराबंदी कड़ी हो रही है, समाजवादी पार्टी के भीतर चिंता बढ़ती जा रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि यह स्थिति केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है बल्कि महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी राजनीतिक हलचल देखी जा रही है। उनके अनुसार पूरा समाजवादी पार्टी ढांचा भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के लिए तैयार है।

गौरतलब है कि सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सहयोगी हैं। इस बीच समाजवादी पार्टी की ओर से ओम प्रकाश राजभर के इन दावों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। यह राजनीतिक बयानबाजी ऐसे समय में सामने आई है जब वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश की अन्य विपक्षी पार्टियां भी आंतरिक विभाजन और नेतृत्व संकट जैसी स्थितियों से जूझ रही हैं। उल्लेखनीय है कि तृणमूल कांग्रेस में हाल के दिनों में बड़े पैमाने पर विभाजन देखा गया है, जबकि शिवसेना (यूबीटी) भी संकट के दौर से गुजर रही है और उसके कुछ सांसदों के सत्ताधारी शिवसेना में शामिल होने की चर्चा है।

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