नई दिल्लीः भारत और G7 देशों के बीच व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत जहां विकसित G7 देशों के बाजारों पर अपने निर्यात के लिए अधिक निर्भर होता जा रहा है, वहीं आयात के मामले में इन देशों पर उसकी निर्भरता घट रही है। इससे संकेत मिलता है कि भारत ने आयात स्रोतों में विविधता बढ़ाई है, जबकि निर्यात का बड़ा हिस्सा उच्च मूल्य वाले विकसित बाजारों की ओर केंद्रित है।
रुबिक्स की रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और G7 देशों के बीच कुल वस्तु व्यापार (निर्यात और आयात) 6.1 प्रतिशत बढ़कर 263 अरब डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि इस अवधि में भारत का व्यापार अधिशेष (ट्रेड सरप्लस) घटा है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह 28 अरब डॉलर था, जो 2025-26 में घटकर 13 अरब डॉलर रह गया। इसका मुख्य कारण आयात में वृद्धि और निर्यात का लगभग स्थिर बने रहना रहा।
रिपोर्ट के अनुसार G7 देशों को भारत का निर्यात 138 अरब डॉलर पर लगभग स्थिर रहा, जबकि इन देशों से आयात 14 प्रतिशत बढ़कर 125 अरब डॉलर पहुंच गया। इसके बावजूद भारत को अमेरिका, कनाडा, इटली और ब्रिटेन के साथ व्यापार में अधिशेष प्राप्त है।
पिछले पांच वर्षों में भारत के कुल निर्यात में G7 देशों की हिस्सेदारी बढ़ी है। यह वित्त वर्ष 2020-21 के 29 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 31 प्रतिशत हो गई। दूसरी ओर, भारत के कुल आयात में G7 देशों की हिस्सेदारी 18 प्रतिशत से घटकर 16 प्रतिशत रह गई।
भारत ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) तथा अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं के जरिए G7 देशों के साथ अपने आर्थिक संबंधों को और मजबूत कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत वैश्विक स्तर पर उच्च मूल्य विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है। विशेष रूप से स्मार्टफोन और अन्य दूरसंचार उपकरणों का निर्यात अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस और इटली जैसे प्रमुख बाजारों में बढ़ रहा है, जिससे इस क्षेत्र को नई गति मिली है।
G7 देशों में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार बना हुआ है। भारत का अमेरिका को निर्यात वित्त वर्ष 2020-21 के 51.6 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 87.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वहीं, 53.5 अरब डॉलर के आयात के साथ अमेरिका भारत का सबसे बड़ा आयात साझेदार भी बन गया है। वित्त वर्ष 2020-21 से 2025-26 के बीच भारत-अमेरिका आयात व्यापार में 13 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की गई।
रिपोर्ट के अनुसार दूरसंचार उपकरणों, खासकर स्मार्टफोन उत्पादन और निर्यात के दम पर भारत वैश्विक विनिर्माण तथा उच्च मूल्य उत्पादन केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। साथ ही G7 देशों से होने वाला आयात यह दर्शाता है कि यह समूह भारत को तकनीक आधारित उत्पादों और औद्योगिक उत्पादन के लिए जरूरी महत्वपूर्ण इनपुट उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाता है।