अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) के मौके पर सुबह 6.30 बजे आयोजित कार्यक्रम में सभी सरकारी कर्मचारियों को हिस्सा लेना पड़ेगा। राज्य सरकार के इस आदेश को चुनौती देते हुए वामपंथी को-ऑर्डिनेशन कमेटी ने कलकत्ता हाई कोर्ट में मामला दायर किया था।
गुरुवार (18 जून) को इस मामले की सुनवाई न्यायाधीश अमृता सिन्हा की खंडपीठ में हुई। सुनवाई के बाद न्यायाधीश अमृता सिन्हा ने राज्य सरकार से एक हलफनामा जमा करने का आदेश दिया है जिसमें यह बताना होगा कि राज्य के मुख्य सचिव को इस तरह के आदेश देने का कोई अधिकार है अथवा नहीं।
शिकायतकर्ता सरकारी संगठन के पक्ष में अदालत में वरिष्ठ वकील विकास रंजन भट्टाचार्य ने सवाल पूछा। उन्होंने कहा कि योग दिवस की तरह पूरे साल और क्या-क्या दिवस हैं? उन्हें रोकते हुए न्यायाधीश ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि आपने वैलेंटाइन्स डे का उल्लेख नहीं किया। उसे क्यों छोड़ा?
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इसके बाद न्यायाधीश ने कहा कि यह अनिवार्य नहीं है लेकिन यह अच्छा है। राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि अगर कोई संगठन इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होना चाहता तो वह अदालत में अलग से मामला दर्ज करें। पिछले साल आंध्र प्रदेश में 3 करोड़ लोग एकत्र हुए थे। इस बार हम रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं।
इतना सुनते ही न्यायाधीश ने कहा कि ऐसी अस्वस्थ प्रतियोगिता नहीं होनी चाहिए। मामले की अगली सुनवाई कल (19 जून) यानी शुक्रवार को होगी।
गौरतलब है कि इस साल अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का मुख्य कार्यक्रम कोलकाता में आयोजित होने वाला है। इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आने वाले हैं। रेड रोड पर मेगा इवेंट का आयोजन किया जाएगा।
राज्य सरकार ने योगाभ्यास में सभी सरकारी कर्मचारियों का शामिल होना अनिवार्य किया है। राज्य के सभी सरकारी ऑफिसों के कर्मचारियों को 21 जून की सुबह 6.30 से 7.45 बजे तक योग दिवस के कार्यक्रम में शामिल होने का आदेश दिया गया है।