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महिला आरक्षण विधेयक को लेकर किरेन रिजिजू का कांग्रेस पर हमला, अन्य दलों को विरोध के लिए उकसाने का आरोप

दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने से अटका था संविधान संशोधन विधेयक, 2029 से 33% आरक्षण का था प्रस्ताव

By डॉ. अभिज्ञात

Jun 18, 2026 18:12 IST

नई दिल्ली: महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के संसद में पारित नहीं हो पाने के बाद केंद्र सरकार ने एक बार फिर सभी राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील की है। केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि देश की आधी आबादी से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर न्याय सुनिश्चित किया जाएगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस संबंध में कई बार अपनी प्रतिबद्धता जता चुके हैं।

किरेन रिजिजू ने महिला आरक्षण विधेयक में प्रस्तावित संशोधन को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार इस विषय पर गंभीर है और सभी दलों से समर्थन की अपेक्षा रखती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिन दलों ने इस संविधान संशोधन विधेयक का विरोध किया था, वे भविष्य में अपना रुख बदलकर इसका समर्थन करेंगे।


दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने से अटक गया था विधेयक

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होता है। उनके अनुसार सरकार की ओर से सभी विपक्षी दलों से समर्थन मांगा गया था, लेकिन आवश्यक संख्या नहीं जुट पाने के कारण विधेयक पारित नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि विधेयकों को पारित कराने के लिए विभिन्न दलों का समर्थन हासिल करना सरकार की जिम्मेदारी है। हालांकि विधेयक को कब और किस तरह आगे बढ़ाया जाएगा, इस पर बाद में चर्चा की जाएगी।


लोकसभा सीटें बढ़ाने का भी था प्रस्ताव

संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के अनुसार वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद लोकसभा की सीटों की संख्या वर्तमान 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव रखा गया था। इसका उद्देश्य वर्ष 2029 के आम चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून को प्रभावी रूप से लागू करना था। इसके अलावा महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव शामिल था।


महिला आरक्षण को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई

महिला आरक्षण विधेयक पर सरकार की आगे की रणनीति के बारे में पूछे जाने पर किरेन रिजिजू ने कहा कि जब यह विधेयक पारित नहीं हो सका तो सरकार को निराशा हुई थी। उन्होंने कहा कि दो-तिहाई बहुमत की संवैधानिक आवश्यकता पूरी न होने के कारण यह विधेयक आगे नहीं बढ़ पाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत की महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उनके अनुसार यह मुद्दा देश की लगभग 50 प्रतिशत आबादी से जुड़ा है और इसलिए सभी राजनीतिक दलों को इस पर सकारात्मक रुख अपनाना चाहिए।


कांग्रेस पर लगाया विपक्ष को प्रभावित करने का आरोप

रिजिजू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अन्य विपक्षी दलों को विधेयक का विरोध करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा आयोजित परामर्श बैठक में शामिल न होने के लिए विपक्षी दलों को कांग्रेस ने प्रभावित किया था।

केंद्रीय मंत्री के अनुसार सरकार ने विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ खुलकर बातचीत की थी और किसी प्रकार के पर्दे के पीछे संवाद की आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी सहित कई प्रमुख दलों के साथ बैठक हुई थी और सरकार के प्रस्तावों को लेकर सकारात्मक चर्चा भी हुई थी। रिजिजू ने दावा किया कि संभवतः कुछ दल कांग्रेस के दबाव में आ गए और उन्होंने विधेयक का समर्थन नहीं किया। हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में सभी दल महिला आरक्षण विधेयक के समर्थन में आगे आएंगे।

अप्रैल में संसद में हार का सामना करना पड़ा था

उल्लेखनीय है कि 17 अप्रैल को मोदी सरकार को उस समय झटका लगा था जब वर्ष 2029 से विधानमंडलों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका था। लोकसभा में इस विधेयक के समर्थन में 298 सांसदों ने मतदान किया था, जबकि 230 सांसदों ने इसका विरोध किया था। कुल 528 सदस्यों ने मतदान में भाग लिया था। संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए 352 मतों की आवश्यकता थी, जो दो-तिहाई बहुमत के बराबर थी।

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