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पश्चिम एशिया तनाव का असर, 40 महत्वपूर्ण उत्पादों पर ड्यूटी छूट बढ़ाने की तैयारी

पेट्रोकेमिकल उद्योग को आपूर्ति व्यवधान से बचाने के लिए 30 जून के बाद भी जारी रह सकती है सीमा शुल्क राहत

By डॉ. अभिज्ञात

Jun 18, 2026 14:42 IST

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से माल ढुलाई पर पड़ रहे प्रभाव के बीच केंद्र सरकार करीब 40 महत्वपूर्ण उत्पादों पर दी गई आयात शुल्क छूट को 30 जून के बाद भी जारी रखने पर विचार कर रही है। अधिकारियों के अनुसार अंतिम निर्णय क्षेत्रीय परिस्थितियों, आपूर्ति श्रृंखला की स्थिति और राजस्व पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करने के बाद लिया जाएगा।


पश्चिम एशिया संघर्ष से बढ़ी चुनौतियां

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य पर प्रभावी अवरोध के कारण कच्चे तेल, खाद्य पदार्थों और उर्वरकों के आयात की लागत में वृद्धि देखी गई है। इसके साथ ही जलडमरूमध्य के रास्ते मालवाहक जहाजों की आवाजाही में उल्लेखनीय कमी आने से कच्चे माल की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। अधिकारियों का मानना है कि क्षेत्रीय हालात सामान्य होने तक उद्योगों को राहत देने और आपूर्ति श्रृंखला को सुचारु बनाए रखने के लिए सरकार विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही है।


अप्रैल में दी गई थी अस्थायी राहत

घरेलू उद्योगों को आपूर्ति श्रृंखला में संभावित व्यवधान से बचाने के लिए सरकार ने 2 अप्रैल से कुछ महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल उत्पादों के आयात पर सीमा शुल्क को अस्थायी रूप से शून्य कर दिया था। इस कदम को 'अस्थायी और लक्षित राहत' के रूप में लागू किया गया था ताकि उद्योगों को कच्चे माल की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल सके।

40 उत्पादों पर लागू है शून्य सीमा शुल्क

सरकार ने लगभग 40 अलग-अलग उत्पादों पर सीमा शुल्क को शून्य किया था। इनमें एनहाइड्रस अमोनिया, टोल्यून, स्टाइरीन, विनाइल क्लोराइड मोनोमर सहित कई अन्य महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल उत्पाद शामिल हैं। इसके अलावा जिन उत्पादों पर शुल्क छूट दी गई है उनमें मेथेनॉल, डाइक्लोरोमीथेन (मेथिलीन क्लोराइड), पॉली ब्यूटाडाइन, स्टाइरीन ब्यूटाडाइन और अनसैचुरेटेड पॉलिएस्टर रेजिन जैसे उत्पाद भी शामिल हैं।

कई उद्योगों को मिल रहा लाभ

यह छूट उन क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है जो पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक और मध्यवर्ती रसायनों पर निर्भर हैं। इनमें प्लास्टिक, पैकेजिंग, वस्त्र, दवा उद्योग, रसायन क्षेत्र, ऑटोमोबाइल कलपुर्जे और अन्य विनिर्माण क्षेत्र शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन उद्योगों के लिए कच्चे माल की लागत को नियंत्रित रखने और आपूर्ति में बाधा से बचाने के उद्देश्य से यह राहत दी गई थी।

राजस्व प्रभाव का भी होगा आकलन

सरकारी सूत्रों के अनुसार आयात शुल्क छूट को आगे बढ़ाने के फैसले में राजस्व संबंधी पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि यदि छूट की अवधि बढ़ाई जाती है तो उससे सरकारी राजस्व पर पड़ने वाले प्रभाव का मूल्यांकन आवश्यक होगा। एक अधिकारी ने बताया कि पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियों और होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते माल परिवहन की स्थिति का विस्तृत विश्लेषण करने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

सीमा शुल्क संग्रह का बड़ा लक्ष्य

सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए सीमा शुल्क राजस्व संग्रह का लक्ष्य 2.71 लाख करोड़ रुपये निर्धारित किया है। इसके मुकाबले वित्त वर्ष 2025-26 में सीमा शुल्क से 2.64 लाख करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था।

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