प्रदीप चक्रवर्ती, चुंचुड़ा
हुगली जिले की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। वर्तमान में जेल में बंद चुंचुड़ा के पूर्व विधायक असित मजूमदार को तृणमूल कांग्रेस ने श्रीरामपुर संगठनात्मक जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पार्टी राज्य में अपने संगठनात्मक ढांचे को पुनर्गठित कर रही है और पुराने तथा अनुभवी चेहरों को फिर से सक्रिय भूमिका में ला रही है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह नियुक्ति केवल एक संगठनात्मक बदलाव नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ बनाने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। लंबे समय से पार्टी से जुड़े और कठिन समय में भी सक्रिय रहे नेताओं को फिर से जिम्मेदारी देकर संगठन को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
टिकट विवाद से लेकर सक्रिय राजनीति में मौजूदगी
असित मजूमदार विधानसभा चुनाव में टिकट न मिलने के बाद शुरुआती असंतोष के बावजूद अंततः पार्टी उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार करते नजर आए थे। इसके बाद भी उन्होंने राजनीतिक गतिविधियों से दूरी नहीं बनाई और लगातार संगठनात्मक कार्यक्रमों में सक्रिय बने रहे।
विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को झटका लगने के बाद जब कई नेता निष्क्रिय हो गए, उस समय भी असित मजूमदार लगातार राजनीतिक मैदान में सक्रिय रहे और कार्यकर्ताओं के बीच उनकी मौजूदगी बनी रही।
आंदोलन से गिरफ्तारी तक का घटनाक्रम
एक समय जब तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी पर हमले की घटना सामने आई थी, तब असित मजूमदार ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया था। इसी दौरान पुलिस कार्रवाई के तहत उन्हें गिरफ्तार किया गया।
इसके बाद एक पुराने मामले में भी उनकी गिरफ्तारी हुई और वर्तमान में वे न्यायिक हिरासत में हैं। इसके बावजूद पार्टी संगठन में उनकी भूमिका और सक्रियता को नजरअंदाज नहीं किया गया।
जेल में मिली नई जिम्मेदारी, भावुक हुए नेता
सूत्रों के मुताबिक, जेल में पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनसे मुलाकात कर नई जिम्मेदारी की जानकारी दी। इस खबर को सुनकर असित मजूमदार भावुक हो गए।
उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से पार्टी के साथ जुड़े हुए हैं और कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी संगठन का साथ नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने यह भी दोहराया कि वे शुरू से ही ममता बनर्जी के साथ रहे हैं और आगे भी पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखेंगे।
राजनीतिक सफर और संगठन में पकड़
असित मजूमदार का राजनीतिक सफर लंबा रहा है। वे 2011 में पहली बार चूंचुड़ा से विधायक बने और इसके बाद लगातार तीन बार इस सीट से जीत दर्ज की। 2021 में उन्होंने भाजपा उम्मीदवार को हराकर महत्वपूर्ण जीत हासिल की थी।
इसके अलावा 2024 के लोकसभा चुनाव में भी उनकी संगठनात्मक भूमिका को अहम माना गया था, जहां पार्टी प्रत्याशी की जीत में उनकी सक्रियता चर्चा में रही।
संगठनात्मक संदेश और रणनीति
तृणमूल कांग्रेस के इस फैसले को संगठनात्मक पुनर्गठन की बड़ी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी की कोशिश है कि जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाले और लंबे समय से जुड़े नेताओं को फिर से आगे लाकर संगठन को मजबूती दी जाए।
इस निर्णय को कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश देने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है कि कठिन समय में पार्टी के साथ खड़े रहने वालों को जिम्मेदारी से दूर नहीं किया जाएगा।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और माहौल
इस फैसले के बाद हुगली जिले में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पार्टी के भीतर इसे सकारात्मक कदम बताया जा रहा है, जबकि राजनीतिक हलकों में इस निर्णय के मायने को लेकर चर्चा जारी है।
कई नेताओं का मानना है कि यह कदम संगठन को फिर से सक्रिय करने और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने में सहायक होगा।