रिसड़ाः हुगली जिला के रिसड़ा में बुधवार को आयोजित बंगीय प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन के कार्यक्रम ने उस समय राजनीतिक रंग ले लिया, जब पश्चिम बंगाल की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने तृणमूल कांग्रेस को लेकर बेहद तीखे बयान दिए। उनके बयान ने राज्य की सियासत में नई बहस और टकराव की स्थिति पैदा कर दी है।
मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने दावा किया कि 4 मई को आए 2026 के विधानसभा चुनाव परिणामों के महज एक महीने के भीतर ही तृणमूल कांग्रेस की स्थिति पूरी तरह कमजोर हो गई है। उन्होंने आश्चर्य जताते हुए कहा कि उन्हें कभी यह अंदाजा नहीं था कि पार्टी इतनी तेजी से इस स्थिति तक पहुंच जाएगी। किसी ने सोचा ही नहीं था कि महीने भर में पार्टी खत्म हो जाएगी।
15 साल की सत्ता और बदलते राजनीतिक हालात
अपने संबोधन में अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस पिछले 15 वर्षों से पश्चिम बंगाल की सत्ता में रही है। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक यह सवाल उनके मन में भी रहा कि क्या इस सरकार को सत्ता से हटाया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि उस दौर में पुलिस, प्रशासन और पूरी व्यवस्था पर एक ही राजनीतिक दल का प्रभाव था, जिससे विपक्ष के लिए चुनौती बेहद कठिन थी। लेकिन समय के साथ राजनीतिक परिस्थितियां बदलती गईं और सत्ता समीकरण भी परिवर्तित होते गए।
‘नींव कमजोर थी इसलिए गिरावट तय थी’
अग्निमित्रा पॉल ने तृणमूल कांग्रेस पर सीधा हमला करते हुए कहा कि किसी भी राजनीतिक संगठन की मजबूती उसकी नींव और विचारधारा पर निर्भर करती है। उनके अनुसार तृणमूल कांग्रेस की नींव ही कमजोर थी, इसलिए थोड़े से दबाव में ही पूरा ढांचा बिखरता नजर आ रहा है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वह कभी नहीं सोच सकती थीं कि एक महीने के भीतर ही पार्टी इस तरह की स्थिति में पहुंच जाएगी।
विधायकों और सांसदों में बगावत का दावा
अग्निमित्रा पॉल ने पार्टी के भीतर कथित टूट का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि 80 विधायकों में से करीब 58 विधायक अलग गुट बनाकर खुद को ‘असली तृणमूल’ बता रहे हैं।
इसके अलावा उन्होंने लोकसभा को लेकर भी बड़ा दावा किया। उनके अनुसार 28 सांसदों में से 19 सांसदों ने अलग होकर एक नया समूह बनाया है, जो अब एनडीए को समर्थन दे रहा है।
राजनीतिक दबाव और कार्रवाई का संकेत
मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने यह भी कहा कि पिछले 15 वर्षों में जो लोग राजनीतिक दबाव और डर का माहौल कायम कर राज करते , अब उन पर कार्रवाई हो रही है। उन्होंने संकेत दिया कि जो लोग अभी कार्रवाई से बाहर हैं, उनके खिलाफ भी भविष्य में कदम उठाए जा सकते हैं।
संगठनात्मक ढांचे पर सीधा हमला
अपने बयान में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की कार्यशैली और संगठनात्मक संरचना को कमजोर बताते हुए कहा कि यह एक ‘डगमगाता ढांचा’ है, जो लंबे समय तक टिक नहीं सकता। उन्होंने इसे विचारधारा और संगठनात्मक अनुशासन की कमी से जोड़कर देखा।
तृणमूल की प्रतिक्रिया का इंतजार
इस पूरे बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है, हालांकि तृणमूल कांग्रेस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस बयान को पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़े सियासी विवाद के रूप में देखा जा रहा है, जिस पर आगे और प्रतिक्रियाएं आने की संभावना है।