नई दिल्ली : भारत की अर्थव्यवस्था इस समय ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन भविष्य की विकास यात्रा को तय कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कृषि से बाहर निकलकर उद्योग और सेवा क्षेत्र जैसे अधिक लाभकारी क्षेत्रों में कार्यरत लोगों की संख्या बढ़ाई जाए तो देश की आर्थिक वृद्धि को नई गति मिल सकती है। इसी दिशा में केंद्र सरकार भी रोजगार बढ़ाने के उद्देश्य से कई योजनाओं पर काम कर रही है।
वर्ष 1954 में प्रसिद्ध अर्थशास्त्री सर आर्थर लुईस ने यह सिद्धांत प्रस्तुत किया था कि किसी देश को गरीब से समृद्ध बनाने में केवल पूंजी बाजार से निवेश जुटाना पर्याप्त नहीं होता। उन्होंने कहा था कि यदि कृषि क्षेत्र से श्रमिकों का स्थानांतरण उद्योग और सेवा क्षेत्रों जैसे अधिक उत्पादक एवं लाभदायक क्षेत्रों में हो, तो अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ सकती है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि सर आर्थर लुईस की यह अवधारणा बाद के वर्षों में दुनिया के कई देशों के विकास का आधार बनी। अब भारत भी लगभग उसी परिवर्तनकारी दौर में प्रवेश कर चुका है। ऐसे में नीति-निर्माताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि देश की बढ़ती कार्यबल के अनुरूप पर्याप्त रोजगार के अवसर कैसे उपलब्ध कराए जाएं।
इसके साथ ही यह भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि संगठित क्षेत्र में रोजगार कितनी तेजी से बढ़ता है और क्या वह युवाओं को तेजी से विस्तार कर रही उत्पादन व्यवस्था में स्थिर एवं सुरक्षित रोजगार उपलब्ध करा पाएगा।
आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 में आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीरियॉडिक लेबर फोर्स) और जनसांख्यिकीय आंकड़ों के आधार पर अनुमान लगाया गया है कि मौजूदा दशक के दौरान हर वर्ष कृषि के अलावा अन्य क्षेत्रों में लगभग 78.5 लाख नए रोजगार सृजित करने की आवश्यकता होगी।
इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2025 में केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना को मंजूरी दी। इस योजना का उद्देश्य देश में रोजगार की कमी को दूर करना और संगठित क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नई नौकरियों के अवसर पैदा करना है।
योजना के तहत कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के माध्यम से 99,446 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इसके जरिए जुलाई 2027 तक दो वर्षों की अवधि में संगठित क्षेत्र में 3.5 करोड़ से अधिक रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस योजना में ऐसे कर्मचारियों को विशेष लाभ देने का भी प्रावधान है, जिनकी मासिक आय एक लाख रुपये से कम है। यदि वे पहली बार ईपीएफओ में पंजीकरण कराते हैं, तो उन्हें 15,000 रुपये तक की वित्तीय सहायता प्राप्त हो सकती है। सरकार का मानना है कि इससे संगठित क्षेत्र में रोजगार को बढ़ावा मिलेगा और अधिक युवाओं को औपचारिक कार्यबल से जुड़ने का अवसर मिलेगा।