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विपक्ष के नेता पद पर ऋतब्रत की दावेदारी बरकरार, स्पीकर के फैसले में दखल से हाईकोर्ट का इनकार

कोर्ट ने कहा- ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता चुनने के फैसले में कुछ भी गलत नहीं है।

By श्वेता सिंह

Jun 18, 2026 13:35 IST

कोलकाताः पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी असाधारण हलचल के बीच कलकत्ता हाईकोर्ट ने विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में ऋतब्रत बनर्जी की मान्यता पर तत्काल हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है। अदालत के इस फैसले से विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस द्वारा दिया गया निर्णय फिलहाल बरकरार रहेगा। कोर्ट के इस फैसले से तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी को जबर्दस्त झटका लगा है। इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस के भीतर गहराते राजनीतिक विभाजन और शक्ति संतुलन को लेकर चर्चाओं ने राज्य की सियासत को और अधिक गर्मा दिया है।

न्यायमूर्ति कृष्ण राव की पीठ ने गुरुवार को उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें निष्कासित तृणमूल कांग्रेस नेता ऋतब्रत बनर्जी को पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष का नेता मान्यता देने के स्पीकर के फैसले को चुनौती दी गई थी। अदालत ने किसी भी प्रकार का अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार करते हुए सभी पक्षों को तीन सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। इसके बाद दो सप्ताह में प्रत्युत्तर दायर किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को निर्धारित की गई है।

हाईकोर्ट के रुख का सीधा असर यह हुआ है कि विधानसभा अध्यक्ष का निर्णय फिलहाल प्रभावी बना रहेगा और ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता के रूप में मिली मान्यता पर कोई रोक नहीं लगेगी।

राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों के बीच तृणमूल कांग्रेस के 58 विधायक पहले ही विधानसभा के भीतर अलग गुट का गठन कर चुके हैं। विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस ने इस गुट को मान्यता देते हुए ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता स्वीकार किया है। इसी फैसले को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया गया था।

दूसरी ओर, पार्टी के भीतर विभाजन की तस्वीर केवल विधानसभा तक सीमित नहीं है। लोकसभा में भी काकोली घोष दस्तिदार के नेतृत्व में दो-तिहाई सांसदों ने त्रिपुरा आधारित नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय का दावा किया है। इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भेजकर निचले सदन में अलग बैठने की व्यवस्था उपलब्ध कराने का अनुरोध भी किया है।

अदालती कार्यवाही के बाद तृणमूल कांग्रेस सांसद और अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने कहा कि हाईकोर्ट ने कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया है, हालांकि याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि अदालत ने हलफनामे दाखिल करने के निर्देश दिए हैं और मामले की अंतिम सुनवाई जुलाई में होगी।

इस बीच, ऋतब्रत बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में फ्लोर टेस्ट कराए जाने के विचार का समर्थन किया है। मंगलवार को इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को लेकर विभिन्न तरह के दावे और बयान सामने आ रहे हैं, जबकि मीडिया भी इस घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है।

ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि यदि विधानसभा अध्यक्ष को यह आवश्यक लगता है तो शक्ति परीक्षण कराया जाना चाहिए। उनके अनुसार, फ्लोर टेस्ट होने पर सदन में विधायकों की वास्तविक संख्या और समर्थन की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे राजनीतिक बयानबाजी, दावों का सिलसिला समाप्त होगा तथा यह भी साफ हो जाएगा कि किस पक्ष के पास वास्तव में कितना समर्थन मौजूद है।

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