तेहरान (ईरान) : ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के राष्ट्रपतियों द्वारा समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद उसका उल्लंघन करना किसी भी पक्ष के लिए पहले की तुलना में अधिक महंगा साबित होगा। उनका कहना है कि जब किसी दस्तावेज़ पर दोनों देशों के सर्वोच्च अधिकारी अपनी स्वीकृति देते हैं तो उसे तोड़ने की राजनीतिक और कूटनीतिक कीमत भी बढ़ जाती है।
इस्माइल बकाई ने बताया कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने दोनों देशों के बीच 14 बिंदुओं वाले समझौता ज्ञापन पर वर्चुअल माध्यम से हस्ताक्षर किए हैं। इससे पहले फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात के बाद ट्रंप ने पत्रकारों से कहा था कि उन्होंने इस समझौते पर वर्साय में हस्ताक्षर किए।
ईरानी प्रवक्ता के अनुसार दोनों देशों ने यह निष्कर्ष निकाला कि किसी एक स्थान पर उपस्थित होकर हस्ताक्षर करने के बजाय राष्ट्रपति स्तर पर वर्चुअल तरीके से दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करना बेहतर विकल्प होगा। उन्होंने कहा कि इस निर्णय के पीछे कई कारण हैं जिनमें सबसे महत्वपूर्ण यह है कि जब दस्तावेज़ पर दोनों देशों के सर्वोच्च पदों पर बैठे नेताओं के हस्ताक्षर होते हैं तो उसे तोड़ने की कीमत और अधिक बढ़ जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे में किसी अतिरिक्त औपचारिक समारोह की आवश्यकता नहीं रह जाती।
यह समझौता ज्ञापन दोनों देशों के बीच शत्रुता समाप्त करने, हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और प्रतिबंधों के साथ-साथ ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंतिम समझौते के लिए 60 दिनों की वार्ता प्रक्रिया शुरू करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
इस्माइल बकाई ने बताया कि इस 60 दिन की अवधि के दौरान दोनों पक्ष परमाणु मुद्दे और ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाने से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा करेंगे। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि संवर्धित परमाणु सामग्री (एनरिच्ड मैटेरियल) को ईरान से बाहर भेजना उनके लिए स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने यह दावा भी किया कि ईरान का महाशक्ति होना केवल एक नारा नहीं है क्योंकि उनके अनुसार ईरान ने दो परमाणु शक्तियों को पराजित किया है। बकाई ने कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ही ईरान की वास्तविक पहचान है और देश के विरोधी उसकी इस पहचान को अलग करने की कोशिश कर रहे थे। उनके अनुसार ईरान और इस्लामिक गणराज्य को अलग-अलग मानना केवल एक भ्रम है और हर देशभक्त नागरिक इसे समझता है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह भी बताया कि शांति समझौता ज्ञापन पर फ़ारसी और अंग्रेज़ी, दोनों भाषाओं में हस्ताक्षर किए गए हैं ताकि किसी प्रकार की अस्पष्टता की गुंजाइश न रहे। उन्होंने कहा कि ईरान ने इस बात पर विशेष जोर दिया था कि दस्तावेज़ दोनों भाषाओं में उपलब्ध हो। यदि यह केवल अंग्रेज़ी में होता, तो व्यक्तिपरक अनुवाद की संभावना रहती। उनके अनुसार, फ़ारसी पाठ अंग्रेज़ी संस्करण के पूरी तरह अनुरूप है और ईरान की दृष्टि से समान रूप से वैध है।
इस्माइल बकाई ने स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित ईरान-अमेरिका वार्ता को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को होने वाली बातचीत की अभी पुष्टि नहीं हुई है। उनके अनुसार, कुछ घंटे पहले तक शुक्रवार के सत्र की पुष्टि थी लेकिन जब यह तय हुआ कि दोनों देशों के राष्ट्रपति स्वयं समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे तब शुक्रवार की बैठक पर दोबारा विचार करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन पर ईरान और अमेरिका के राष्ट्रपतियों द्वारा हस्ताक्षर किए जा चुके हैं।