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तारकेश्वर में 'पश्चिम बंगाल दिवस' कार्यक्रम आयोजित करने का क्या है कारण? मंच पर सज रहे थाईलैंड, ऊटी के फूल!

सिर्फ थाईलैंड ही नहीं बल्कि मंच की साज-सज्जा के लिए तमिलनाडु के ऊटी से जार्बेरा और लीली के फूलों को लाया गया है।

By Moumita Bhattacharya

Jun 19, 2026 19:17 IST

कल यानी 20 जून को तारकेश्वर में आयोजित होने वाला है 'पश्चिम बंगाल दिवस'। भारी बारिश और बिजली गिरने जैसी प्राकृतिक आपदा को नजरंदाज कर स्टेज की सजावट का काम चल रहा है। स्टेज को सजाने के लिए थाईलैंड से एन्थूरियम फूलों को मंगाया गया है।

सिर्फ थाईलैंड ही नहीं बल्कि मंच की साज-सज्जा के लिए तमिलनाडु के ऊटी से जार्बेरा और लीली के फूलों को लाया गया है। कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लेने राज्य के मंत्री अजय कुमार पोद्दार, विधायक संतु पान और दीपांजन गुहा पहुंचे। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी समेत अन्य मंत्रियों और अधिकारियों के उपस्थित होने की संभावना है।

पर क्या आप जानते हैं कि 'पश्चिम बंगाल दिवस' के लिए तारकेश्वर को ही क्यों चुना गया है?

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बता दें, तारकेश्वर के वैद्यबाटी 12 नंबर रोड के पास बालीगड़ी मैदान में 'पश्चिम बंगाल दिवस' का मुख्य कार्यक्रम आयोजित होगा। कार्यक्रम स्थल के पास ही हेलीपैड बनाया गया है। बताया जाता है कि प्रधानमंत्री के सभा स्थल के दोनों तरफ कुल मिलाकर 5 हैंगर लगाए गए हैं।

इसके साथ ही कोलकाता की पुरानी पीली टैक्सी, हाथ रिक्शा, दक्षिणेश्वर मंदिर, बेलुड़ मठ और मिट्टी के सजावटी सामग्रियों से मंच को सजाया गया है। मंच तक आने-जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति की जांच मेटल डिटेक्टर से की जा रही है। बताया जाता है कि तमलुक से फूलों के 26 कारिगरों को बुलाया गया है जो थाईलैंड, उटी समेत देश के अन्य हिस्सों से मंगाए गए फूलों को कलात्मक रूप से पिछले कुछ दिनों से मंच पर सजा रहे हैं।

ऐसे ही एक कारीगर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पहला बड़ा कार्यक्रम है। हमें फूलों की सजावट के लिए बुलाया गया है जिससे हम बहुत खुश हैं। एक अन्य कारीगर ने कहा कि इस बार नई सरकार आयी है। इसलिए हम स्पेशल तरीके से सजा रहे हैं।


विदेशों और दूसरे राज्यों से मंगाए गए फूल Image : Ei Samay

क्यों तारकेश्वर में ही आयोजित हो रहा है यह कार्यक्रम?

'पश्चिम बंगाल दिवस' के मौके पर राज्य में आने के बाद प्रधानमंत्री मोदी तारकेश्वर मंदिर में पूजा करने के बाद रैली को संबोधित करेंगे। तारकेश्वर को कार्यक्रम का मुख्य स्थल के तौर पर चुनने के पीछे एक विशेष कारण भी है। 20 जून 1947 को, जब ब्रिटिश शासन अपने आखिरी पड़ाव पर था, तब एक विभाजन के उस दौर में बंगाल विधानसभा में एक विधेयक पारित हुआ था।

TOI की मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार इस विधेयक में कहा गया था कि विभाजन के बाद पश्चिम बंगाल भारत का हिस्सा बनेगा। इसका फैसला बंगीय हिंदु महासभा की तीन दिवसीय एक बैठक में लिया गया जो तारकेश्वर में ही आयोजित हुई थी। बताया जाता है कि इस बैठक का नेतृत्व श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने किया था।

मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार यह बैठक तारकेश्वर स्कूल में 4 से 7 अप्रैल के बीच आयोजित हुई थी। इस वजह से तारकेश्वर का बहुत ही बड़ा ऐतिहासिक महत्व है। भाजपा नेताओं का कहना है कि 20 जून को प्रधानमंत्री मोदी का तारकेश्वर दौरा श्यामा प्रसाद मुखर्जी को ही दी गयी श्रद्धांजलि होगी।

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