नई दिल्ली : विश्व आर्थिक मंच (WEF) की एनर्जी ट्रांजिशन इंडेक्स (ETI) 2026 रिपोर्ट में भारत को ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने वाले प्रमुख देशों में शामिल किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार बुनियादी ढांचे और मानव संसाधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार के कारण भारत की तैयारी में बड़ा उछाल आया है जिससे वह वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन के अगले चरण का एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनकर उभर रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने ईटीआई रैंकिंग में दो स्थानों की प्रगति दर्ज की है। यह सुधार ऊर्जा क्षेत्र में बेहतर तैयारी और व्यापक स्तर पर प्रणालीगत सुधारों के कारण संभव हुआ है। विशेष रूप से आधारभूत संरचना में तेज वृद्धि के साथ-साथ ऊर्जा समानता (इक्विटी), सतत विकास (सस्टेनेबिलिटी) और वित्तीय निवेश के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।
विश्व आर्थिक मंच के अनुसार, वर्ष 2026 में दुनिया के 56 प्रतिशत देशों ने अपने ऊर्जा परिवर्तन सूचकांक (ईटीआई) स्कोर में सुधार किया। औसतन सिस्टम प्रदर्शन में 0.43 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण ऊर्जा समानता और सतत विकास से जुड़े संकेतकों में सुधार रहा।
हालांकि, रिपोर्ट यह भी बताती है कि केवल 24 प्रतिशत देश ही ऊर्जा प्रणाली के तीनों प्रमुख प्रदर्शन मानकों पर एक साथ प्रगति कर सके। वर्ष 2025 में यह आंकड़ा 28 प्रतिशत था जिससे स्पष्ट होता है कि व्यापक स्तर पर वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन की गति धीमी पड़ रही है।
डब्ल्यूईएफ ने कहा कि वर्ष 2026 में कुल ईटीआई स्कोर लगभग स्थिर रहा और इसमें केवल 0.03 प्रतिशत का मामूली बदलाव दर्ज किया गया। रिपोर्ट के अनुसार सिस्टम प्रदर्शन में सुधार के बावजूद पिछले एक दशक में पहली बार ऊर्जा परिवर्तन की तैयारी में गिरावट आई है जो इस बात का संकेत है कि भविष्य की प्रगति के लिए आवश्यक बुनियादी आधार कमजोर हो रहे हैं।
रिपोर्ट में भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों को भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार बताया गया है। विशेष रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न व्यवधानों ने पहले से मौजूद कमजोरियों को और बढ़ा दिया है। इसके अलावा भू-राजनीतिक विभाजन, बढ़ती ऊर्जा मांग और सीमित क्षेत्रों में केंद्रित निवेश के कारण अग्रणी और पिछड़े देशों के बीच अंतर और अधिक बढ़ गया है।
विश्व स्तर पर ऊर्जा क्षेत्र में रिकॉर्ड निवेश के बावजूद अपेक्षित स्थिरता हासिल नहीं हो सकी। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक ऊर्जा निवेश बढ़कर 3.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें 2.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में लगाए गए। इसके बावजूद ऊर्जा सुरक्षा की स्थिति कमजोर हुई और ऊर्जा परिवर्तन की तैयारी में गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि केवल पूंजी निवेश पर्याप्त नहीं है बल्कि उसे टिकाऊ बनाने के लिए अनुकूल परिस्थितियां भी आवश्यक हैं।
रिपोर्ट में निवेश वितरण को भी एक बड़ी चुनौती बताया गया है। वित्त और निवेश से जुड़े संकेतकों में सबसे अधिक 1.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। डब्ल्यूईएफ के अनुसार, वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा निवेश का 75 प्रतिशत हिस्सा केवल कुछ चुनिंदा बाजारों में केंद्रित है, जबकि भविष्य की ऊर्जा मांग में 80 प्रतिशत वृद्धि जिन देशों से होने की संभावना है, उन्हें विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में दो से तीन गुना अधिक वित्तीय लागत का सामना करना पड़ रहा है।
भौगोलिक दृष्टि से विकसित देशों ने अपनी बढ़त बरकरार रखी है और नॉर्डिक देशों ने शीर्ष स्थानों पर कब्जा बनाए रखा है। वहीं उभरती अर्थव्यवस्थाओं का प्रदर्शन मिश्रित रहा। भारत इस सूचकांक में 70वें स्थान पर रहा लेकिन प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में ऊर्जा सुरक्षा, किफायती व्यवस्था और निवेश के आधार पर तैयारी में सबसे उल्लेखनीय सुधार करने वाले देशों में शामिल रहा।
डब्ल्यूईएफ की एनर्जी ट्रांजिशन इंडेक्स 2026 रिपोर्ट ने ऊर्जा परिवर्तन की अगली अवस्था को गति देने के लिए तीन प्रमुख प्राथमिकताओं पर जोर दिया है। इनमें सुरक्षा, किफायती व्यवस्था और लचीलापन को ऊर्जा प्रणाली के मूल सिद्धांत के रूप में अपनाना, ग्रिड विस्तार और प्रणाली एकीकरण में तेजी लाकर परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को दूर करना तथा स्थिर नीतियों और लक्षित पूंजी प्रवाह के माध्यम से निवेश के अनुकूल वातावरण को मजबूत करना शामिल है।