हमारे देश का गौरव हमारा राष्ट्रीय ध्वज जितना ऊंचा लहराता है, हमारा सिर भी गर्व से उतना ही ऊपर उठा रहता है। दिल्ली के सभी प्रमुख मोड़ या फिर सार्वजनिक स्थानों पर ऊंचे-ऊंचे तिरंगों को आपने जरूर देखा होगा लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह कौन सी सरकारी योजना का हिस्सा है?
इन विशालकाय तिरंगों को लगाने और इनके रख-रखाव में सरकार को कितना खर्च करना पड़ता है? आइए आपको इस बारे में जानकारी देते हैं -
साल 2024 को सरकारी योजना 'देशभक्ति' के तहत ₹104 करोड़ की लागत से करीब 500 तिरंगों को विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर लगाया गया था। इन तिरंगों को सिर्फ लगा ही नहीं दिया गया है बल्कि नियमित रूप से इनका रख-रखाव, देखभाल और साफ-सफाई का काम भी किया जाता है। लेकिन इस साल गर्मी के मौसम में दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में आयी तेज आंधियों से इन तिरंगों को बचाना बहुत मुश्किल हो गया था।
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क्या है देशभक्ति प्रोग्राम?
दिल्ली की पूर्व सरकार (आम आदमी पार्टी) ने साल 2022 में 'देशभक्ति' प्रोग्राम की शुरुआत हुई थी। उस साल के दिल्ली बजट में इसके लिए आवश्यक वित्तीय आवंटन भी किया गया था। बताया जाता है कि इस योजना के तहत दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में करीब 500 तिरंगों को लहराया गया था।
HT की मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार प्रत्येक झंडे का आनुमानिक आकार 35 फीट X 50 फीट निर्धारित किया गया था। इन झंडों को 115 फीट ऊंचे एक फ्लैग पोल अथवा दंड पर फहराया गया था। प्राथमिक रूप से इस योजना के लिए करीब ₹104 करोड़ का खर्च आया था।
कैसे होता है इन विशाल तिरंगों का रख-रखाव?
PWD से हुए समझौते के आधार पर ही इन स्मारकों (झंडों) के रख-रखाव को सुनिश्चित किया गया था। बताया जाता है कि इन तिरंगों को मुख्य रूप से पॉलिएस्टर के कपड़े से बनाया गया है। इस करार के मुताबिक प्रत्येक तिरंगे को बदलने से पहले अधिकतम 5 बार धोया या साफ किया जा सकता है।
हालांकि नियमित रूप से इन तिरंगों को धोने के अलावा साल में कम से कम 4 बार इन तिरंगों को बदलना अनिवार्य है। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अलावा विभिन्न राष्ट्रीय उत्सवों के समय इन झंडों को बदलने की तिथि निर्धारित की जाती है।
इस बारे में मीडिया से बात करते हुए PWD मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि ये सभी झंडे आकार में बेहद विशाल हैं। इसलिए बार-बार धोने की वजह से स्वाभाविक रूप से इन तिरंगों का कपड़ा खराब हो जाता है।
तेज आंधी से पहुंचा नुकसान
पिछले 2-3 सप्ताह में दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में आयी आंधी की वजह से इन तिरंगों को काफी नुकसान पहुंचा है। मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार 9 जून को लगभग 120 किलोमीटर की रफ्तार से आयी आंधी की वजह से सरोजिनी नगर, सीमापुरी, नंद नगरी, निजामुद्दीन, शकुरपुर, मदनपुर खदर, कमला नेहरू रिजर के पास एमजी रोड, अशोक विहार फेज 3, मालव्य नगर, दिलशाद कॉलोनी, सदर बाजार के पास नया बाजार रोड और धौला कुआं में राष्ट्रीय ध्वज को नुकसान पहुंचने की जानकारी मिली है।
बताया जाता है कि नुकसान की मात्रा इतनी ज्यादा थी कि मौसम बिगड़ने पर आपातकालीन व्यवस्था के तौर पर अस्थायी रूप से 500 राष्ट्रीय ध्वजों को नीचे उतार लेने का फैसला लेना पड़ा था।
उठाए जा रहे कौन से कदम?
मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली की भाजपा सरकार अब और भी अधिक मजबूत और आंधी-बारिश को झेलने लायक कपड़े के बारे में पता लगाने के लिए तकनीकी समीक्षा यानी अध्ययन करने का आदेश दिया है।
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PWD मंत्री प्रवेश वर्मा ने बताया कि इंजीनियरों के एक समूह को परिधानों की निर्यात करने वाली कंपनियों का जायजा लेने के लिए कहा गया है। प्राथमिक तौर पर उन्होंने 5 प्रकार के कपड़ों की सूची भी तैयार की है। आंधी-बारिश जैसी परिस्थिति में इन कपड़ों की मजबूती को परखने का काम किया जाएगा।
किए जाएंगे कौन से मुख्य बदलाव?
कपड़ा : कपड़ों के घनत्व और वजन को बढ़ाने के लिए उच्च जीएसएम और सिलाई के लिए बेहतर धागों का इस्तेमाल किया जाएगा।
धुलाई : बार-बार धोने की वजह से कपड़े की गुणवत्ता नष्ट न हो। इसे सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक झंडे को सर्वाधिक कितनी बार धोया जा सकता है, इसकी संख्या को घटा दिया जाए।
संख्या में बदलाव : साल में नए झंडे लगाने की संख्या को वर्तमान की तुलना में दोगुना करके चार बार के बजाए 8 बार किया जाएगा।
टेंडर की संशोधित शर्तों के मुताबिक ठेकेदार को नए और बेहतर गुणवत्ता के कपड़ों का इस्तेमाल करना होगा। राष्ट्रीय ध्वजों को धोने के लिए नई समय सूची का सख्ती से पालन करना पड़ेगा। इंजीनियरों के समूह को अगले 2 सप्ताह के अंदर अपनी सिफारिश को जमा करने की हिदायत दी गयी है।