दिल्ली हाई कोर्ट ने मैसेजिंग ऐप Telegram पर बैन को जारी रखा। केंद्र सरकार के फैसले पर अपनी सहमति जताते हुए हाई कोर्ट ने स्पष्ट रूप से बता दिया कि इस ऐप को बैन करने की जायज वजह है। गौरतलब है कि NEET UG की पुनर्परीक्षा से पहले टेलीग्राम पर लगाए गए बैन को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में मामला दायर किया था।
उसी मामले की सुनवाई में हाई कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। सिर्फ प्रश्नपत्रों की खरीद-फरोख्त ही नहीं बल्कि केंद्र सरकार का आरोप है कि ड्रग रैकेट, साइबर क्राइम, पॉर्नोग्राफी वीडियो की लेन-देन से लेकर कई तरह के गैरकानूनी काम टेलीग्राम के माध्यम से किए जाते हैं।
केंद्र सरकार ने इसे नया डार्क वेब करार दिया है। इसका आरोप लगाते हुए ही केंद्र सरकार ने अदालत में इस ऐप के खिलाफ शिकायत दर्ज की है। दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार (19 जून) को टेलीग्राम पर लगायी गयी पाबंदी को जारी रखा है और स्पष्ट रूप से कहा है कि सरकार द्वारा दी गयी वजह बिल्कुल जायज है और कानूनी रूप से वैध है। अदालत ने परीक्षा में पारदर्शिता को बनाए रखने और जनहित को ध्यान में रखते हुए ही यह फैसला सुनाया है।
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न्यायाधीश तेजस करिया ने अपने फैसले में कहा कि NEET UG की परीक्षा के मद्देनजर नकल व अनुचित साधनों को रोकने के लिए केंद्र सरकार की पाबंदी 'जायज' है और उसे कानूनी तरीके से ही लागू किया गया है।
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के तहत जारी किए गए आदेश को चुनौती देते हुए टेलीग्राम के आवेदन को अदालत ने खारिज कर दिया। तेजस करिया ने कहा कि सरकार द्वारा उठाया गया कदम न्यूनतम ही है। वर्तमान समय में सरकार का कदम को गैरकानूनी नहीं कहा जा सकता है।
गौरतलब है कि अदालत में केंद्र और परीक्षा संचालन संस्था ने NEET UG की री-टेस्ट से पहले टेलीग्राम के कुछ चैनल पर प्रश्नपत्रों के लीक होने के दावा ने परीक्षार्थियों में उलझन पैदा कर दी थी।
इस फर्जी खबर को हथियार बनाकर टेलीग्राम प्लेटफार्म पर संगठित धोखाधड़ी गिरोह सक्रिय हो गया। सरकार का दावा है कि प्रश्नपत्र असल में लीक हुआ हो या नहीं हुआ हो लेकिन 'लीक हो गया' ऐसा प्रचार करना भी परीक्षार्थियों के साथ विश्वासघात करने का हथियार बन सकता है।
टेलीग्राम ने अदालत से अपनी दलील में कहा कि कुछ यूजर्स द्वारा गलत इस्तेमाल करने की वजह से पूरे प्लेटफार्म पर पाबंदी लगाना उचित नहीं है। कंपनी ने दावा किया कि उन्होंने अपने प्लेटफार्म से सैंकड़ों संदेहास्पद लिंक और कॉन्टेंट हटा लिया है।
इस पाबंदी की वजह से यूजर्स को जानकारी प्राप्त करने के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। लेकिन अदालत ने अपने फैसले में सरकार के सावधानीपूर्ण रवैया को अधिक महत्व दिया। इस वजह से 22 जून तक टेलीग्राम पर पाबंदी लागू रहेगी। 30 जून तक इसका सीमित इस्तेमाल किया जा सकेगा।