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शराब परिवहन घोटाले में बड़ा एक्शन, ईडी ने पूर्व मंत्री के बेटे को गिरफ्तार किया

आंध्र प्रदेश शराब टेंडर घोटाला: मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी की कार्रवाई तेज

By प्रियंका महतो

Jun 18, 2026 19:20 IST

नई दिल्ली : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित शराब परिवहन अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व आंध्र प्रदेश मंत्री करुमुरी वेंकट नागेश्वर राव के पुत्र करुमुरी सुनील कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत जांच के दायरे में है।

ईडी अधिकारियों के अनुसार यह गिरफ्तारी उस व्यापक जांच का हिस्सा है, जिसमें आंध्र प्रदेश में शराब परिवहन अनुबंधों के आवंटन और निष्पादन में कथित अनियमितताओं की जांच की जा रही है। यह पूरा मामला वाईएसआर कांग्रेस पार्टी सरकार के कार्यकाल से जुड़ा बताया जा रहा है।

इस कार्रवाई से पहले ईडी के हैदराबाद जोनल कार्यालय ने 11 जून को इस मामले से जुड़े पांच स्थानों पर छापेमारी की थी। यह तलाशी अभियान पीएमएलए के प्रावधानों के तहत किया गया था। जिन परिसरों पर छापे पड़े, उनमें करुमुरी सुनील कुमार, उनके पिता, कथित शराब घोटाले के मुख्य आरोपी केसिरेड्डी राजा शेखर रेड्डी, आंध्र प्रदेश सरकार के पूर्व आईटी सलाहकार, दोंतिरेड्डी वासुदेव रेड्डी, आंध्र प्रदेश स्टेट बेवरेजेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एपीएसबीसीएल) के पूर्व प्रबंध निदेशक, तथा अन्य व्यक्तियों के परिसर शामिल थे।

छापेमारी के दौरान एजेंसी ने एक लग्जरी कार, ₹94.5 लाख मूल्य की महंगी घड़ियां और बड़ी मात्रा में बेहिसाब नकदी जब्त की थी। इसके अलावा कई आपत्तिजनक दस्तावेज, संदिग्ध संयुक्त उद्यम समझौते, नकद लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड और संपत्ति से संबंधित कागजात भी बरामद किए गए थे।

इसी दिन ईडी ने केसिरेड्डी राजा शेखर रेड्डी और दोंतिरेड्डी वासुदेव रेड्डी को भी गिरफ्तार किया था। यह पूरा मामला आंध्र प्रदेश पुलिस की सीआईडी द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुआ था, जिसमें राज्य के खजाने को लगभग ₹195.33 करोड़ के नुकसान की बात सामने आई थी।

जांच में सामने आया है कि आंध्र प्रदेश स्टेट बेवरेजेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एपीएसबीसीएल) के शराब परिवहन टेंडर की शर्तों में जानबूझकर बदलाव किया गया और उन्हें चुनिंदा कंपनियों के पक्ष में तैयार किया गया। इनमें सिग्मा सप्लाई चेन सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड (एसएससीएसपीएल) और बाद में प्रसाद ट्रांसपोर्ट्स जैसी संस्थाएं शामिल थीं, जो केवल मुखौटा कंपनियों के रूप में काम कर रही थीं, जबकि वास्तविक नियंत्रण कथित रूप से केसिरेड्डी राजा शेखर रेड्डी, दोंतिरेड्डी वासुदेव रेड्डी और उनके सहयोगियों के पास था।

ईडी के अनुसार इस शराब गिरोह ने शराब को डिपो से रिटेल दुकानों तक पहुंचाने के दौरान अवैध लाभ कमाने के लिए एक संगठित तंत्र तैयार किया था। जांच एजेंसी का यह भी कहना है कि केसिरेड्डी राजा शेखर रेड्डी, टुकेकुला ईश्वर किरण कुमार रेड्डी और अंजनी कुमार ने दोंतिरेड्डी वासुदेव रेड्डी के साथ मिलकर प्रभाव का दुरुपयोग किया और ऊंची दरों पर शराब परिवहन टेंडर हासिल किए, जिससे भारी मात्रा में अवैध कमाई (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) उत्पन्न हुई।

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