पेरिस: फ्रांस की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी मिस्ट्राल AI के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी आर्थर मेंश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई अपनी बैठक को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि दोनों के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास, उसकी व्यापक पहुंच और देशों की डिजिटल स्वायत्तता से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने भारत के साथ मिलकर "सॉवरेन AI" क्षमताओं के विकास में सहयोग की संभावना भी जताई।
भारत के लिए पूर्ण AI समाधान विकसित करने पर चर्चा
आर्थर मेंश ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ बातचीत का प्रमुख विषय ऐसा संपूर्ण AI ढांचा विकसित करना था जो मजबूत, आत्मनिर्भर और बाहरी नियंत्रण से मुक्त हो। उनके अनुसार मिस्ट्राल AI विभिन्न देशों के लिए सॉवरेन AI समाधान विकसित कर रही है और इस क्षेत्र में भारत के साथ सहयोग की पर्याप्त संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि चर्चा इस बात पर भी केंद्रित रही कि किस प्रकार AI तकनीक को आम नागरिकों, सरकारी कर्मचारियों और समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाया जा सकता है ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।
AI को जनसामान्य तक पहुंचाने पर जोर
मिस्ट्राल AI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने कहा कि बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि AI केवल चुनिंदा संस्थानों तक सीमित न रहे, बल्कि आम लोगों के लिए भी उपयोगी और सुलभ बने।
उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी भारत के साथ मिलकर लोगों को AI संबंधी प्रशिक्षण उपलब्ध कराने में रुचि रखती है। इससे स्टार्टअप्स, उद्यमियों और आम नागरिकों को नई तकनीक को समझने, तेजी से सीखने, व्यवसाय विकसित करने और अपने दैनिक कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने में मदद मिल सकती है।
मोदी की समझ और नेतृत्व से प्रभावित हुए मेंश
आर्थर मेंश ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ यह उनकी पहली द्विपक्षीय बैठक थी, हालांकि इससे पहले वे AI इम्पैक्ट समिट और जी-7 सम्मेलन जैसे कार्यक्रमों में उनसे मिल चुके हैं। उन्होंने कहा कि वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विषय में प्रधानमंत्री की समझ और नेतृत्व क्षमता से प्रभावित हुए हैं। उनके अनुसार प्रधानमंत्री मोदी की सोच और मिस्ट्राल AI द्वारा पिछले तीन वर्षों से प्रस्तुत किए जा रहे दृष्टिकोण में काफी समानता दिखाई देती है।
सॉवरेन AI पर रही विस्तृत चर्चा
मेंश ने कहा कि बैठक के दौरान इस बात पर विस्तार से विचार किया गया कि प्रत्येक देश को कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े पूरे तकनीकी ढांचे पर नियंत्रण बनाए रखने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा आपूर्ति से लेकर डेटा प्रोसेसिंग, टोकन निर्माण तथा तकनीक के वितरण तक AI के हर स्तर पर देशों की भागीदारी और नियंत्रण महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार भारत, यूरोपीय संघ और अन्य देशों के लिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि AI से होने वाली प्रगति और आर्थिक लाभ का फायदा सीधे उनके नागरिकों तक पहुंचे।
'AI पर संप्रभु देशों और कंपनियों का नियंत्रण जरूरी'
आर्थर मेंश ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता इतनी महत्वपूर्ण तकनीक है कि इसे केवल कुछ बाहरी संस्थाओं के नियंत्रण में नहीं छोड़ा जा सकता। AI के विकास और संचालन में संप्रभु देशों तथा उनकी कंपनियों की महत्वपूर्ण भूमिका होनी चाहिए। दुनिया भर में सॉवरेन AI समाधानों की मांग बढ़ रही है और मिस्ट्राल AI इस दिशा में विभिन्न देशों के साथ काम कर रही है। सरल शब्दों में देश का अपना AI इकोसिस्टम ही सॉवरेन AI कहलाता है।
विदेश मंत्रालय ने भी दी जानकारी
इससे पहले विदेश मंत्रालय ने भी प्रधानमंत्री मोदी और आर्थर मेंश की मुलाकात की जानकारी साझा की थी। मंत्रालय के अनुसार प्रधानमंत्री ने भारत के तेजी से विकसित हो रहे AI इकोसिस्टम में मौजूद अवसरों को रेखांकित किया। विदेश मंत्रालय ने बताया कि आर्थर मेंश ने भारत के साथ सहयोग करने और भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर नवाचार को बढ़ावा देने तथा AI क्षमताओं का विस्तार करने में गहरी रुचि व्यक्त की। मोदी की फ्रांस यात्रा के दौरान पेरिस में यह उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हुई।