तेल अवीवः मध्य पूर्व में शांति की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के हमले में इजरायली सेना के चार सैनिकों की मौत के बाद इजरायल ने आक्रामक रुख अपनाते हुए व्यापक जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। इस घटनाक्रम ने न केवल युद्धविराम की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंकाओं को भी मजबूत कर दिया है।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ शब्दों में कहा है कि उनके देश के सैनिकों और क्षेत्र पर होने वाले हमलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने हिजबुल्लाह को चेतावनी देते हुए कहा कि संगठन को अपने हमलों की "बहुत भारी कीमत" चुकानी होगी।
ड्रोन हमले ने बदला माहौल
इजरायली रक्षा बल (आईडीएफ) के मुताबिक दक्षिणी लेबनान में एक संदिग्ध विस्फोटक ड्रोन हमले में 52वीं आर्मर्ड बटालियन के कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल डोर गडलियाह बेन सिम्होन सहित चार सैनिक मारे गए। यह हमला ऐसे समय हुआ जब क्षेत्र में युद्धविराम लागू होने का दावा किया जा रहा था।
हमले के बाद इजराइली नेतृत्व ने इसे युद्धविराम का गंभीर उल्लंघन करार दिया और तत्काल सैन्य प्रतिक्रिया का फैसला लिया। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने मृत सैनिकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि देश उनके बलिदान को कभी नहीं भूलेगा।
रातभर चला सैन्य अभियान
हमले के कुछ ही घंटों बाद इजरायली वायुसेना और सेना ने दक्षिणी तथा पूर्वी लेबनान में व्यापक अभियान शुरू किया। प्रधानमंत्री के अनुसार सेना ने हिजबुल्लाह से जुड़े 80 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया और कई लड़ाकों को मार गिराया।
इजरायल का दावा है कि इन ठिकानों का इस्तेमाल संगठन की सैन्य गतिविधियों, हथियार भंडारण और हमले की योजनाओं के लिए किया जा रहा था। इसके बाद शुक्रवार सुबह बेका घाटी में स्थित हिजबुल्लाह के एक प्रमुख मुख्यालय पर भी हमला किया गया।
नेतन्याहू का सख्त संदेश
रक्षा मंत्री और सेना प्रमुख के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद नेतन्याहू ने कहा कि सेना को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी खतरे को जड़ से खत्म किया जाए।
उन्होंने कहा कि इजरायल अपने सैनिकों या नागरिकों को निशाना बनाने वाले किसी भी समूह के खिलाफ कठोर कार्रवाई करेगा। उनके अनुसार यह केवल जवाबी हमला नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसे हमलों को रोकने का संदेश भी है।
दक्षिणी लेबनान से पीछे हटने के मूड में नहीं इजराइल
नेतन्याहू ने एक बार फिर दोहराया कि दक्षिणी लेबनान में स्थापित सुरक्षा क्षेत्र से इजरायली सेना की वापसी फिलहाल एजेंडे में नहीं है। उन्होंने कहा कि उत्तरी इजरायल की बस्तियों और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित होने तक सेना वहां मौजूद रहेगी।
यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इजरायल की इस सैन्य मौजूदगी को लेकर ईरान और हिजबुल्लाह लगातार आपत्ति जताते रहे हैं।
आईडीएफ ने कहा कि हाल के दिनों में हिजबुल्लाह ने कई बार युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन किया है। सेना का आरोप है कि संगठन न केवल अपनी सैन्य गतिविधियां जारी रखे हुए है, बल्कि इजरायली बलों के खिलाफ नए हमलों की तैयारी भी कर रहा है।
इजरायली वायुसेना के अनुसार बेका घाटी और दक्षिणी लेबनान में किए गए ताजा हमले इन्हीं गतिविधियों के जवाब में किए गए हैं।
एक और हमले में घायल हुए सैनिक
तनाव को और बढ़ाने वाली एक अन्य घटना में गुरुवार रात हिजबुल्लाह द्वारा छोड़े गए विस्फोटक ड्रोन ने कफर तेबनित क्षेत्र में इजराइली कमांडो ब्रिगेड के जवानों को निशाना बनाया। इस हमले में पांच सैनिक घायल हुए, जिनमें एक की हालत गंभीर बताई गई।
सेना का कहना है कि इस तरह की घटनाएं साबित करती हैं कि क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति अभी भी बेहद नाजुक बनी हुई है।
युद्धविराम के भविष्य पर उठे सवाल
हालांकि ईरान और अमेरिका के बीच हुए हालिया समझौते में इजरायल-लेबनान सीमा पर शत्रुता समाप्त करने की बात कही गई थी, लेकिन ताजा घटनाक्रम ने उस प्रक्रिया को झटका दिया है। लगातार हमलों और जवाबी कार्रवाई के कारण यह आशंका बढ़ गई है कि यदि तनाव इसी तरह जारी रहा तो युद्धविराम लंबे समय तक टिक नहीं पाएगा।
विश्लेषकों का मानना है कि दक्षिणी लेबनान में बढ़ती सैन्य गतिविधियां केवल स्थानीय संघर्ष नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे व्यापक क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और ईरान-इजरायल प्रतिद्वंद्विता भी जुड़ी हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं, इस पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।