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उद्धव ठाकरे का तीखा वार: “दोष साबित हुआ तो पद छोड़ दूंगा, लेकिन शिवसेना किसी ‘चोर’ को नहीं दूंगा”

बीजेपी और शिंदे गुट पर जोरदार हमला, लोकतंत्र पर खतरे का आरोप। विलय की अटकलों को खारिज, अंदरूनी टूट के बीच राजनीतिक सख्ती।

By श्वेता सिंह

Jun 20, 2026 02:15 IST

मुंबईः मुंबई में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के 60वें स्थापना दिवस पर पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया। उन्होंने अपने संबोधन में साफ कहा कि अगर उनके खिलाफ लगाए गए आरोप साबित हो जाते हैं तो वे अपने पद से इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं, लेकिन किसी भी स्थिति में वे शिवसेना को “किसी चोर” के हाथों में नहीं जाने देंगे।

उद्धव ठाकरे ने अपने भाषण में भारतीय जनता पार्टी और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा राजनीतिक रणनीतियां लोकतंत्र को कमजोर कर रही हैं और जनता का भरोसा लगातार डगमगा रहा है। उनके मुताबिक, देश में चुनावी राजनीति का स्वरूप बदलता जा रहा है और संस्थागत संतुलन पर असर पड़ रहा है।

इसी दौरान उन्होंने शिवसेना (UBT) के कांग्रेस में विलय की अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया। ठाकरे ने कहा कि वे शुरू से शिवसेना से जुड़े हैं और इसकी स्वतंत्र पहचान को किसी अन्य दल में मिलाने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों के विलय को लेकर फैल रही अफवाहें पूरी तरह निराधार हैं।

अपने संबोधन में उद्धव ठाकरे ने “ऑपरेशन कमल” जैसी राजनीतिक रणनीतियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीति लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा को कमजोर करती है और संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने जेपी नड्डा के एक पुराने बयान का हवाला देते हुए यह भी सवाल उठाया कि क्या देश एक पार्टी व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है।

उद्धव ठाकरे ने अपने नेतृत्व पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि यदि वे कार्यकर्ताओं और जनता से दूर होते, तो पार्टी चुनावी सफलता हासिल नहीं कर पाती। उन्होंने कहा कि उनका संगठन और कार्यकर्ताओं के साथ लगातार संवाद बना रहता है।

उन्होंने अपने परिवार और ‘मातोश्री’ आवास पर लगाए गए आरोपों को भी खारिज किया और कहा कि यह सब राजनीतिक द्वेष और बदले की भावना से प्रेरित है।

इसी बीच पार्टी के भीतर संभावित टूट और असंतोष की चर्चाएं भी तेज हैं। कुछ सांसदों की अनुपस्थिति और बदलते राजनीतिक समीकरणों को लेकर अटकलें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे शिवसेना (UBT) की संगठनात्मक स्थिति पर नजर बनी हुई है।

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