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रक्षा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी GRSE को मिला नवरत्न दर्जा, आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिलेगी नई मजबूती

राजस्व में 300% और मुनाफे में 294% की वृद्धि के बाद केंद्र का बड़ा फैसला। चेयरमैन बोले- कंपनी के इतिहास का निर्णायक क्षण।

By श्वेता सिंह

Jun 20, 2026 17:49 IST

कोलकाताः रक्षा क्षेत्र की सार्वजनिक उपक्रम कंपनी गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। केंद्र सरकार के लोक उद्यम विभाग ने कोलकाता स्थित इस प्रतिष्ठित युद्धपोत निर्माण कंपनी को 'नवरत्न' का दर्जा प्रदान किया है। कंपनी के लगातार बेहतर वित्तीय प्रदर्शन, उत्पादन क्षमता और रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए यह सम्मान दिया गया है।

कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार को GRSE को औपचारिक रूप से नवरत्न का दर्जा मिला। इसके साथ ही कंपनी को निवेश, कारोबार विस्तार और रणनीतिक फैसले लेने में पहले की तुलना में अधिक वित्तीय और परिचालन स्वतंत्रता प्राप्त होगी। माना जा रहा है कि इससे रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में कंपनी की भूमिका और मजबूत होगी।

चार वर्षों में कई गुना बढ़ा कारोबार

पिछले कुछ वर्षों में GRSE ने उल्लेखनीय वित्तीय प्रगति दर्ज की है। वित्त वर्ष 2021-22 में कंपनी का परिचालन राजस्व 1,754 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर 2025-26 में 7,002 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यानी चार वर्षों में कंपनी के राजस्व में लगभग 300 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

इसी अवधि में कंपनी के शुद्ध लाभ में भी तेज उछाल देखने को मिला। 2021-22 में 190 करोड़ रुपये का लाभ कमाने वाली कंपनी ने 2025-26 में 748 करोड़ रुपये का कर पश्चात लाभ अर्जित किया। यह लगभग 294 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।

युद्धपोत निर्माण में लगातार बढ़ी क्षमता

GRSE केवल रक्षा क्षेत्र के लिए ही नहीं, बल्कि वाणिज्यिक जहाजों के निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभा रही है। बीते वित्त वर्ष के दौरान कंपनी ने कुल आठ युद्धपोतों की डिलीवरी की। इनमें एक दिन में तीन युद्धपोतों की डिलीवरी भी शामिल है, जो 30 मार्च 2026 को की गई थी।

कंपनी लंबे समय से भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल और मित्र देशों के लिए जहाजों का निर्माण करती रही है। यही वजह है कि भारतीय समुद्री सुरक्षा ढांचे में इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

भारतीय नौसेना को सबसे अधिक युद्धपोत देने वाली कंपनी

अधिकारियों के अनुसार, जीआरएसई अब तक कुल 118 युद्धपोतों की डिलीवरी कर चुकी है। इनमें से 80 युद्धपोत भारतीय नौसेना में शामिल किए जा चुके हैं। यह उपलब्धि देश के रक्षा जहाज निर्माण क्षेत्र में कंपनी की मजबूत स्थिति को दर्शाती है।

कंपनी ने वर्षों के दौरान आधुनिक तकनीक, स्वदेशी निर्माण क्षमता और समयबद्ध डिलीवरी के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में भी इसकी भूमिका अहम रही है।

‘कंपनी की यात्रा का निर्णायक क्षण’

जीआरएसई के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक, कमोडोर पी. आर. हरि (सेवानिवृत्त) ने नवरत्न का दर्जा मिलने को कंपनी के इतिहास का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि न केवल संगठन की वर्षों की मेहनत का परिणाम है, बल्कि भविष्य की संभावनाओं के नए द्वार भी खोलेगी।

उन्होंने कहा कि नवरत्न का दर्जा मिलने से कंपनी को रणनीतिक परियोजनाओं में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने, रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर मिलेगा।

समुद्री शक्ति बनने के लक्ष्य को मिलेगा बल

कमोडोर पी. आर. हरि ने कहा कि यह दर्जा भारत को वर्ष 2047 तक एक प्रमुख समुद्री शक्ति बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को भी गति देगा। उनके अनुसार, जीआरएसई आने वाले वर्षों में उन्नत जहाज निर्माण, रक्षा तकनीक और निर्यात क्षमता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए तैयार है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नवरत्न का दर्जा मिलने से जीआरएसई को बड़े निवेश निर्णय लेने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति बढ़ाने में मदद मिलेगी, जिससे भारतीय रक्षा उद्योग को भी लाभ होगा।

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