ताइपे : ताइवान के आसपास चीन की सैन्य गतिविधियों में एक बार फिर बढ़ोतरी देखी गई है। ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को जानकारी दी कि उसके क्षेत्र के आसपास चीन की सेना के विमानों, नौसैनिक जहाजों और आधिकारिक जहाजों की गतिविधियां दर्ज की गई हैं। ताइवान ने बताया कि उसने स्थिति पर नजर बनाए रखी और जवाबी निगरानी कार्रवाई की।
ताइवान के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय (एमएनडी) के अनुसार शनिवार सुबह 6 बजे (यूटीसी+8) तक उसके आसपास पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के पांच विमान, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (पीएलएएन) के नौ जहाज और पांच आधिकारिक जहाजों की गतिविधियां दर्ज की गईं।
मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि पीएलए के पांच विमानों में से एक विमान ने मध्य रेखा (मीडियन लाइन) को पार किया और ताइवान के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से के वायु रक्षा पहचान क्षेत्र (एडीआईजेड) में प्रवेश किया। ताइवान की सशस्त्र सेनाओं ने स्थिति की निगरानी की और आवश्यक कदम उठाए।
इससे पहले शुक्रवार को भी ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने अपने आसपास चीनी नौसेना के आठ जहाजों की मौजूदगी दर्ज की थी। मंत्रालय ने उस समय भी स्थिति पर नजर रखने और आवश्यक प्रतिक्रिया देने की बात कही थी।
ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा था कि सुबह 6 बजे (यूटीसी+8) तक ताइवान के आसपास पीएलएएन के आठ जहाजों की गतिविधियां देखी गईं। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया था कि उस अवधि के दौरान ताइवान के आसपास पीएलए के किसी विमान की गतिविधि नहीं मिली, इसलिए किसी उड़ान मार्ग का चित्र जारी नहीं किया गया।
इससे पहले गुरुवार को भी ताइवान ने अपने आसपास आठ नौसैनिक जहाजों की मौजूदगी का पता लगाया था। लगातार हो रही इन गतिविधियों को चीन की ओर से ताइवान क्षेत्र के आसपास बढ़ाई जा रही सैन्य सक्रियता के बीच देखा जा रहा है।
इसी बीच ताइवान की पहली स्वदेश निर्मित पनडुब्बी ने जून की शुरुआत में काऊशुंग बंदरगाह से अपने नए समुद्री परीक्षणों के लिए रवाना होकर परीक्षण शुरू किए थे। फोकस ताइवान की रिपोर्ट के अनुसार सैन्य समाचार एजेंसी के हवाले से बताया गया कि यह परीक्षण इस पनडुब्बी का कुल 15वां समुद्री परीक्षण था, जबकि पानी के अंदर संचालन से जुड़ा यह नौवां परीक्षण था।
ताइवान और चीन के बीच विवाद लंबे समय से जारी है। चीन का ताइवान पर दावा ऐतिहासिक, राजनीतिक और कानूनी तर्कों पर आधारित है। बीजिंग का कहना है कि ताइवान चीन का अभिन्न हिस्सा है और यह नीति उसके राष्ट्रीय कानूनों तथा आधिकारिक बयानों में भी शामिल है।
वहीं ताइवान खुद को एक अलग पहचान वाला क्षेत्र मानता है, जहां उसकी अपनी सरकार, सेना और अर्थव्यवस्था है। यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया के अनुसार, ताइवान की स्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संप्रभुता, आत्मनिर्णय और गैर-हस्तक्षेप जैसे सिद्धांतों से जुड़ी बहस का अहम विषय बनी हुई है।
चीन के ताइवान पर दावे की ऐतिहासिक जड़ें किंग राजवंश के समय तक जाती हैं। वर्ष 1683 में किंग राजवंश ने मिंग समर्थक कोक्सिंगा को हराने के बाद ताइवान पर कब्जा किया था। इसके बाद से ताइवान को लेकर चीन का दावा अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक संवेदनशील और विवादित मुद्दा बना हुआ है।