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विश्व के 14वें और एशिया के दूसरे नंबर के ड्रेसेज राइडर अनुष अगरवाला ने एशियाई खेल चयन पर उठाए सवाल, हाईकोर्ट पहुंचे

विश्व के 14वें और एशिया के दूसरे नंबर के ड्रेसेज राइडर अनुष ने एशियाई खेल चयन सूची रद्द करने तथा मामले की न्यायिक समीक्षा की मांग दिल्ली हाईकोर्ट में की है।

By डॉ. अभिज्ञात

Jun 20, 2026 13:47 IST

नई दिल्लीः आगामी एशियाई खेलों के लिए भारतीय ड्रेसेज टीम में रिजर्व खिलाड़ी के रूप में नामित किए जाने के कुछ ही दिनों बाद भारत के शीर्ष रैंकिंग वाले ड्रेसेज राइडर अनुष अगरवाला ने चयन प्रक्रिया को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। विश्व रैंकिंग में 14वें और एशिया में दूसरे स्थान पर मौजूद इस भारतीय खिलाड़ी ने आरोप लगाया है कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता का अभाव रहा।


अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित और पेरिस ओलंपियन अनुष अगरवाला ने भारतीय घुड़सवारी महासंघ (ईएफआई) का संचालन कर रही तदर्थ समिति के खिलाफ तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी याचिका अनुष अगरवाला बनाम भारतीय घुड़सवारी महासंघ की तदर्थ समिति एवं अन्य शीर्षक से संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर की गई है। इस मामले पर 22 जून को सुनवाई प्रस्तावित है।


याचिका में क्या-क्या मांगें की गई हैं?

अनुष अगरवाला ने अपनी याचिका में 16 जून 2026 को ईएफआई की तदर्थ समिति द्वारा जारी चयन सूची को चुनौती दी है। उन्होंने अदालत से कई निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है। याचिका में 16 जून 2026 की चयन सूची को निरस्त करने की मांग की गई है। साथ ही चयन समिति का पुनर्गठन स्वतंत्र और पारदर्शी तरीके से करने तथा उसमें किसी प्रकार के हितों के टकराव को रोकने की मांग भी की गई है।

अनुष ने यह भी अनुरोध किया है कि आगामी एशियाई खेलों के लिए ईएफआई द्वारा जारी चयन मानदंडों, विशेषकर क्लॉज 15 में निर्धारित प्रक्रिया का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

इसके अलावा उन्होंने चयन प्रक्रिया की न्यायिक समीक्षा पूरी होने तक 16 जून की चयन सूची के संचालन और क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाने की मांग भी की है।


किन संस्थाओं को बनाया गया पक्षकार?

इस याचिका में ईएफआई की तदर्थ समिति, उसकी चयन समिति, भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के माध्यम से भारत सरकार को प्रतिवादी बनाया गया है।


चयन सूची को लेकर कैसे शुरू हुआ विवाद?

विवाद तब शुरू हुआ जब तदर्थ समिति ने एशियाई खेलों के लिए भारतीय ड्रेसेज टीम की घोषणा की। टीम में श्रुति वोरा, गौरव पुंडीर, जय सूद और हृदय छेड़ा को शामिल किया गया।

दूसरी ओर, भारत के सबसे अधिक रैंकिंग वाले ड्रेसेज राइडर अनुष अगरवाला को सुदीप्ति हाजेला के साथ रिजर्व खिलाड़ी के रूप में रखा गया। यही निर्णय अब कानूनी विवाद का कारण बन गया है।


चयन प्रक्रिया पर क्या हैं अनुष के आरोप?

याचिका के अनुसार चयन प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी और अंतिम निर्णय किस आधार पर लिए गए, इसकी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।


अनुष का आरोप है कि चयन प्रक्रिया के दौरान उपयोग की गई मेरिट गणना तक उन्हें पहुंच नहीं दी गई। उनका कहना है कि ओलंपिक में भाग लेने वाले, एशियाई खेलों में पदक जीतने वाले और विश्व रैंकिंग में 14वें स्थान पर मौजूद खिलाड़ी को मुख्य टीम से बाहर रखना चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता, पारदर्शिता और महासंघ के अपने मानदंडों के पालन पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।


ईएफआई ने चयन प्रक्रिया का किया बचाव

टीम की घोषणा के बाद अनुष अगरवाला और ईएफआई की तदर्थ समिति के बीच ईमेल के माध्यम से संवाद भी हुआ। महासंघ ने अपने जवाब में कहा कि 18 जून को हुई बैठक के संबंध में अग्रवाला द्वारा किए गए कई दावे तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक हैं। समिति ने कहा कि चयन नीति में व्यक्तिगत सुनवाई का कोई अनिवार्य प्रावधान नहीं था, फिर भी अग्रवाला को विशेष अवसर देकर अपना पक्ष रखने की अनुमति दी गई।

महासंघ के अनुसार अनुष द्वारा प्रस्तुत सभी दस्तावेजों, आपत्तियों और स्पष्टीकरणों का परीक्षण किया गया। इसके बाद पात्र खिलाड़ियों की अंतिम सूची तैयार की गई। समिति का कहना है कि ड्रेसेज टीम का चयन निर्धारित मानदंडों के अनुरूप किया गया और अंतिम निर्णय में बदलाव की कोई आवश्यकता नहीं पाई गई।


भारतीय ड्रेसेज के सबसे सफल खिलाड़ियों में शामिल हैं अनुष

अनुष अगरवाला वर्तमान में विश्व रैंकिंग में 14वें और एशिया में दूसरे स्थान पर हैं। वह भारत के नंबर-1 ड्रेसेज राइडर हैं और हाल के वर्षों में देश के सबसे सफल अश्वक्रीड़ा खिलाड़ियों में गिने जाते हैं।

उन्होंने इतिहास रचते हुए ड्रेसेज स्पर्धा में ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने और उसमें भाग लेने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया।

वह उस भारतीय टीम का हिस्सा रहे जिसने एशियाई खेलों में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीता था। इसके अलावा उन्होंने व्यक्तिगत कांस्य पदक भी जीता और एशियाई खेलों की ड्रेसेज स्पर्धा में व्यक्तिगत पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने।

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस वर्ष भारतीय खिलाड़ियों में सबसे अधिक पीएसजी स्कोर भी अनुष अगरवाला के नाम दर्ज है।


सोशल मीडिया पोस्ट में भी उठाए सवाल

अनुष अगरवाला ने एक विस्तृत सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि उनकी हालिया उपलब्धियों और रैंकिंग को देखते हुए उन्हें रिजर्व खिलाड़ी बनाए जाने का निर्णय आश्चर्यजनक है। उन्होंने लिखा कि वह भारत के नंबर-1 ड्रेसेज राइडर, एशिया के नंबर-2 खिलाड़ी और एफईआई रैंकिंग में विश्व के 14वें स्थान पर हैं। इसके साथ ही इस वर्ष भारतीय खिलाड़ियों में सबसे अधिक पीएसजी स्कोर भी उनके नाम है।

उनका कहना है कि ऐसी उपलब्धियों के बावजूद रिजर्व खिलाड़ी बनाए जाने से चयन में अपनाए गए मानदंडों को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठते हैं।



अपनी उपलब्धियों का किया उल्लेख

सोशल मीडिया पोस्ट में अनुष ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उन्हें भारतीय घुड़सवारी खेलों के लिए कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल करने का अवसर मिला है।

उन्होंने याद दिलाया कि वह एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे हैं। साथ ही व्यक्तिगत कांस्य पदक जीतकर एशियाई खेलों में व्यक्तिगत ड्रेसेज पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने।

उन्होंने यह भी कहा कि वह पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने और उसमें भाग लेने वाले पहले भारतीय ड्रेसेज राइडर हैं।


प्रधानमंत्री और खेल मंत्रालय से की अपील

अनुष अगरवाला ने चयनित खिलाड़ियों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि हर खिलाड़ी को यह जानने का अधिकार है कि चयन संबंधी फैसले किस आधार पर लिए गए।

उन्होंने कहा कि जब मौजूदा रैंकिंग, अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन और सिद्ध उपलब्धियां कुछ और संकेत देती हों, तब खिलाड़ियों को चयन प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। अनुष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) और अन्य संबंधित अधिकारियों से मामले की समीक्षा करने का अनुरोध किया।

उन्होंने कहा कि उनकी कानूनी टीम चयन प्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए कानूनी विकल्पों पर काम कर रही है, ताकि भविष्य में सभी खिलाड़ियों को निष्पक्ष अवसर मिल सकें।


22 जून को होगी सुनवाई

अनुष अगरवाला का कहना है कि उनकी कानूनी चुनौती का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत राहत प्राप्त करना नहीं, बल्कि खिलाड़ी चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। अपने बयान के अंत में उन्होंने कहा कि भारत का प्रतिनिधित्व करने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता अटूट है और वह देश के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते रहेंगे। अब इस मामले पर 22 जून को दिल्ली उच्च न्यायालय में सुनवाई होगी, जहां अदालत चयन प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका और उसमें मांगी गई राहतों पर विचार करेगी।


पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री ने भी दी प्रतिक्रिया

इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री इंद्रनील खान ने कहा कि वह पूरे मामले की जानकारी जुटाएंगे और यह समझने का प्रयास करेंगे कि वास्तव में क्या हुआ है। उन्होंने कहा कि चयन संबंधी निर्णय के पीछे क्या कारण रहे, इसकी भी समीक्षा की जाएगी। इंद्रनील खान ने बताया कि वह केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया के संपर्क में हैं और इस मामले में केंद्र सरकार से विस्तृत जानकारी प्राप्त करेंगे।

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