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विधायकों के हस्ताक्षर विवाद की जांच तेज, शोभनदेब चट्टोपाध्याय के घर पहुंची सीआईडी

विपक्ष का नेता बनाने के प्रस्ताव से जुड़े कथित हस्ताक्षर फर्जीवाड़े की जांच। करीब आधे घंटे तक दर्ज किया बयान, बोले- जांच में पूरा सहयोग कर रहा हूं।

कोलकाताः तृणमूल कांग्रेस के विधायक शोभनदेब चट्टोपाध्याय से जुड़े हस्ताक्षर विवाद की जांच अब नए चरण में पहुंच गई है। इसी सिलसिले में शनिवार सुबह सीआईडी की एक टीम भवानीपुर स्थित उनके आवास पर पहुंची और उनसे पूछताछ की। बताया जा रहा है कि जांचकर्ताओं ने लगभग आधे घंटे तक उनसे बातचीत कर मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी जुटाई।

हस्ताक्षर विवाद की जांच में नया कदम

मामला उस पत्र से जुड़ा है, जिसमें शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाने के प्रस्ताव का उल्लेख किया गया था। आरोप है कि इस प्रस्ताव के समर्थन में कुछ विधायकों के हस्ताक्षर फर्जी तरीके से इस्तेमाल किए गए। इसी कथित हस्ताक्षर फर्जीवाड़े की जांच सीआईडी कर रही है।

सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय से पत्र, हस्ताक्षरों और उससे जुड़े घटनाक्रम के बारे में विस्तार से जानकारी ली। इस दौरान उनका बयान भी दर्ज किया गया।

कई नेताओं से पहले ही हो चुकी है पूछताछ

इस मामले में सीआईडी पहले भी कई प्रमुख नेताओं और विधायकों से पूछताछ कर चुकी है। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी से कई बार पूछताछ की गई है। इसके अलावा चौरंगी की विधायक नयना बंद्योपाध्याय, कोलकाता पोर्ट क्षेत्र के विधायक फिरहाद हकीम और बेलियाघाटा के विधायक कुणाल घोष से भी जांच एजेंसी सवाल-जवाब कर चुकी है।

मीडिया से क्या बोले शोभनदेब?

पूछताछ के बाद मीडिया से बातचीत में शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने कहा कि मामला अदालत में विचाराधीन है, इसलिए वह जांच के विषय में कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उन्होंने जांच एजेंसी को पूरा सहयोग दिया है।

उन्होंने कहा कि वह जांच में "200 प्रतिशत सहयोग" कर रहे हैं और भविष्य में भी ऐसा ही करेंगे। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि यह पूरा घटनाक्रम कुछ लोगों की विशेष रुचि और पहल का परिणाम है, जबकि उनकी ओर से इस तरह की किसी प्रक्रिया की कल्पना भी नहीं की गई थी।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

पूरे विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब विधानसभा अध्यक्ष को तृणमूल कांग्रेस विधायक दल की ओर से एक पत्र भेजा गया। बाद में आरोप लगा कि उस पत्र में कुछ विधायकों के हस्ताक्षर जाली तरीके से जोड़े गए थे।

यह आरोप तृणमूल कांग्रेस के दो विधायकों-ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने लगाया था। हालांकि बाद में दोनों को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। उनके आरोपों के आधार पर ही मामले की जांच शुरू हुई, जो अब सीआईडी के पास है।

सीआईडी लगातार इस मामले से जुड़े दस्तावेजों, बयानों और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। राजनीतिक रूप से संवेदनशील माने जा रहे इस प्रकरण में एजेंसी अब तक कई नेताओं से पूछताछ कर चुकी है और आगे भी जांच जारी रहने की संभावना है।

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