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चीनी उद्योग पर संकट के संकेत, रिकॉर्ड मांग के बीच उत्पादन में गिरावट

बफर स्टॉक घटे, अब उद्योग की नजर मानसून और एथेनॉल नीति पर। निर्यात बाजारों में भी बदलाव, अफ्रीका और खाड़ी देश बने प्रमुख खरीदार।

By डॉ. अभिज्ञात

Jun 21, 2026 17:13 IST

नई दिल्ली: भारत का चीनी उद्योग ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां उत्पादन में लगातार गिरावट और घरेलू खपत में वृद्धि के कारण आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन तेजी से सिमटता जा रहा है। एक्सेंशियल रिसर्च पार्टनर्स की ताजा क्षेत्रीय रिपोर्ट के अनुसार चीनी उत्पादन अपने उच्चतम स्तर से काफी नीचे आ गया है, जबकि घरेलू मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है। इससे उद्योग के सामने आपूर्ति प्रबंधन की चुनौती बढ़ गई है और बफर स्टॉक भी कई वर्षों के निचले स्तर पर पहुंच गए हैं।

रिपोर्ट 'इंडिया शुगर: द स्क्वीज, द साइकिल, द शिफ्ट' के अनुसार वित्त वर्ष 2022 में चीनी उत्पादन 35.8 मिलियन टन के शिखर स्तर पर था, लेकिन इसके बाद लगातार गिरावट दर्ज की गई। उत्पादन वित्त वर्ष 2023 में 32.8 मिलियन टन, वित्त वर्ष 2024 में 32.0 मिलियन टन और वित्त वर्ष 2025 में घटकर 29.3 मिलियन टन रह गया। वित्त वर्ष 2025 का उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में 8 प्रतिशत कम रहा और यह पिछले चार वर्षों का सबसे निचला स्तर है।

मांग बढ़ने से आपूर्ति का अंतर हुआ बेहद कम

रिपोर्ट में कहा गया है कि दूसरी ओर घरेलू खपत लगातार बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2024 में देश की चीनी खपत रिकॉर्ड 29.0 मिलियन टन तक पहुंच गई। इसके कारण उद्योग के पास उपलब्ध आपूर्ति सुरक्षा कवच तेजी से कम हुआ है। अध्ययन के अनुसार वित्त वर्ष 2024 में आपूर्ति और मांग के बीच का अंतर घटकर केवल 0.3 मिलियन टन रह गया, जो पिछले एक दशक का सबसे कम स्तर है। रिपोर्ट का कहना है कि उद्योग के लिए यह स्थिति चिंता का विषय है क्योंकि उत्पादन और खपत लगभग बराबरी पर पहुंच गए हैं।

उद्योग का भविष्य मानसून और एथेनॉल नीति पर निर्भर

रिपोर्ट के मुताबिक अब चीनी उद्योग की दिशा काफी हद तक आगामी फसल चक्र और सरकारी नीतिगत फैसलों पर निर्भर करेगी। विशेष रूप से वित्त वर्ष 2025 में गन्ना उत्पादन भारतीय चीनी मिल संघ (आईएसएमए) के पहले के अनुमान से कम रहने के बाद उद्योग की निगाहें वित्त वर्ष 2026 के मानसून और एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के उपयोग से जुड़ी नीतियों पर टिकी हुई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले महीनों में यही कारक उत्पादन और उपलब्धता को प्रभावित करेंगे।

निर्यात आय अभी भी पुराने शिखर से काफी नीचे

निर्यात के मोर्चे पर रिपोर्ट ने मिश्रित तस्वीर पेश की है। एक ओर भारत की चीनी निर्यात आय अभी भी वित्त वर्ष 2023 के उच्चतम स्तर से काफी नीचे बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर हाल के महीनों में सुधार के संकेत भी दिखाई दिए हैं। वित्त वर्ष 2026 में भारत की चीनी निर्यात आय 2.09 अरब डॉलर रही, जो वित्त वर्ष 2023 के 5.77 अरब डॉलर के शिखर स्तर से 64 प्रतिशत कम है। हालांकि मार्च 2026 तिमाही में निर्यात आय तिमाही-दर-तिमाही आधार पर 34 प्रतिशत बढ़कर 593 मिलियन डॉलर पहुंच गई। रिपोर्ट के अनुसार यह वित्त वर्ष 2022 के निर्यात उछाल के समाप्त होने के बाद सबसे बड़ी क्रमिक वृद्धि है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026 के दौरान शुरुआती तीन तिमाहियों में निर्यात आय लगभग स्थिर बनी रही, लेकिन मार्च 2026 तिमाही में तेज सुधार देखने को मिला, जिससे व्यापारिक गतिविधियों में पुनरुद्धार के संकेत मिले हैं।

बदल रहा है भारत के चीनी निर्यात का भूगोल

रिपोर्ट में भारत के चीनी निर्यात बाजारों में भी बड़ा बदलाव दर्ज किया गया है। वित्त वर्ष 2022 के निर्यात उछाल के दौरान इंडोनेशिया और बांग्लादेश भारत की चीनी के प्रमुख खरीदार थे, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। वित्त वर्ष 2026 में अफ्रीकी और खाड़ी देशों ने भारतीय चीनी निर्यात में प्रमुख भूमिका निभाई है। रिपोर्ट के अनुसार शीर्ष सात निर्यात गंतव्यों में से छह अफ्रीका और खाड़ी क्षेत्र से जुड़े देश हैं।

इस अवधि में सोमालिया, सूडान, जिबूती, श्रीलंका, तंजानिया और संयुक्त अरब अमीरात भारतीय चीनी के प्रमुख आयातकों में शामिल रहे। इससे स्पष्ट है कि भारत के चीनी निर्यात का भौगोलिक स्वरूप तेजी से बदल रहा है।

उत्पादन में 18 प्रतिशत गिरावट, बफर स्टॉक भी घटे

रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2022 के उच्चतम स्तर की तुलना में देश का चीनी उत्पादन लगभग 18 प्रतिशत घट चुका है। इसके विपरीत घरेलू मांग लगातार बढ़ती रही है। इसी कारण बफर स्टॉक भी कई वर्षों के न्यूनतम स्तर के करीब पहुंच गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी मौसम और नीति समर्थन अनुकूल नहीं रहे, तो उद्योग पर आपूर्ति का दबाव और बढ़ सकता है। वहीं बेहतर मानसून और संतुलित एथेनॉल नीति उद्योग को राहत दे सकती है।

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