शादी को जीवन के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक माना जाता है। कहा जाता है कि यह एक जुए के समान होता है, जिसमें दांव पर जीवन को लगाया जाता है। अगर जीवनसाथी अच्छा हुआ तो जिंदगी स्वर्ग सी सुन्दर बन जाती है लेकिन जीवनसाथी को चुनने में अगर गलती हुई तो जिंदगी नरक बन जाती है।
इसलिए लड़का हो या लड़की, हर किसी को अपने जीवनसाथी के चुनाव के समय काफी सावधानी बरतने की जरूरत है। लेकिन कैसे करें अपने लिए सही जीवनसाथी का चुनाव? जल्दबाजी या बाहरी आकर्षण से प्रभावित न होकर कैसे किसी ऐसे व्यक्ति के लिए हामी भरे जो आपके लिए वास्तविक रूप में उपयुक्त होगा?
आइए जान लेते हैं कि प्रेमानंद जी महाराज जीवन साथी के चुनाव करते समय कौन सी बातों पर ध्यान देने के लिए कहते हैं -
चरित्र ही है असली पूंजी
प्रेमानंदजी महाराज कहते हैं कि जीवनसाथी का चयन करते समय सबसे पहले उसके चरित्र का मूल्यांकन करना चाहिए। आज के समय में बहुत से लोग बाहरी सुंदरता को अधिक महत्व देते हैं जबकि किसी व्यक्ति की असली पहचान उसके चरित्र में ही छिपी होती है।
Read Also | जीवन की किन परिस्थितियों में चुप रहना बेहतर होता है?
एक ईमानदार और साफ चरित्र का व्यक्ति कभी भी रिश्ते के विश्वास को नहीं तोड़ता। लेकिन चरित्र में कमजोर व्यक्ति चाहे कितना भी आकर्षक क्यों न हो, वह लंबे समय में रिश्ते में दुख और अशांति का कारण बन सकता है।
संयम है बेहद जरूरी
वर्तमान पीढ़ी की एक बड़ी समस्या है भावनाओं और गुस्से पर नियंत्रण न रख पाना। प्रेमानंदजी महाराज कहते हैं कि जीवनसाथी ऐसा चुनना चाहिए जो अपने गुस्से, खुशी या किसी भी भावना को नियंत्रित करना जानता हो। जो व्यक्ति सोच-समझकर निर्णय लेता है और भावनाओं के बहाव में आकर काम नहीं करता वही एक अच्छा साथी साबित होता है। संयम वाले व्यक्ति के साथ जीवन अधिक खुशहाल बन जाती है।
अच्छे संस्कार रिश्तों को बनाते हैं मजबूत
एक व्यक्ति की शिक्षा, धन या संपत्ति से भी अधिक महत्वपूर्ण उसके संस्कार और व्यवहार होते हैं। इस बारे में प्रेमानंदजी महाराज का मानना है कि अच्छे संस्कार का मतलब है बड़ों का सम्मान करना, छोटों के प्रति स्नेह रखना और सभी के साथ विनम्रता से बात करने जैसी सामान्य सी बातें हैं।
ऐसे लोग आमतौर पर अहंकारी नहीं होते और रिश्तों में शांति बनाए रखने में सक्षम होते हैं। इससे वैवाहिक जीवन में भी बिना वजह होने वाले झगड़ों की संभावना कम हो जाती है।
जो बुरी आदतों को रखें दूरी
प्रेमानंद जी महाराज किसी व्यक्ति के लिए आदर्श जीवनसाथी उसे ही मानते हैं जो नशे की लत, गलत संगत या अन्य हानिकारक आदतों से खुद को दूर रखता हो। ये आदतें शुरुआत में भले ही छोटी लगती हो लेकिन समय के साथ रिश्तों पर ये काफी गहरा असर डालती हैं। ये आदतें धीरे-धीरे रिश्तों में दूरी बढ़ाती हैं
Read Also | कहीं साइलेंट ब्रेकअप की तरफ तो नहीं बढ़ रहा आपका रिश्ता, इन तरीकों से पहचाने
एक जिम्मेदार व्यक्ति निभाता है रिश्ते
शादी-विवाह सिर्फ एक सामाजिक बंधन नहीं है बल्कि यह एक बड़ी जिम्मेदारी है। इसलिए ऐसा जीवनसाथी चुनना चाहिए, जो रिश्ते को महत्व दे और उसे बनाए रखने के लिए ईमानदारी से प्रयास करें। जो सुख-दुख, अच्छे-बुरे हर परिस्थिति में जिम्मेदारी के साथ खड़ा हो। जिम्मेदार के साथ खड़ा एक समर्पित व्यक्ति ही कठिन समय में भी रिश्ते को टूटने नहीं देता।
पिछले दिनों जब एक युवती ने प्रेमानंद जी महाराज से पूछा था कि जीवनसाथी को चुनते समय कौन सी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है, तब उन्होंने कहा कि एक आदर्श जीवनसाथी में पांच गुण होना बेहद जरूरी है।
यदि किसी व्यक्ति में अच्छा चरित्र, आत्मसंयम, अच्छे संस्कार, बुरी आदतों से दूर रहना और जिम्मेदारी का भाव, ये सभी गुण होते हैं तो उसका वैवाहिक जीवन सुखी, स्थिर और लंबे समय तक टिका रह सकता है। फिर चाहे वह स्त्री हो या पुरुष।