तारातला के निर्माणाधीन गोदाम में छत ढहने के हादसे में बचाव कार्य आखिरकार संपन्न हो गया। 72 घंटे बाद औपचारिक रूप से बचाव अभियान संपन्न होने की घोषणा की गयी है। इसके बाद मलबा हटाने की जिम्मेदारी कोलकाता नगर निगम (KMC) की होगी।
हालांकि अभी तक KMC ने मलबा साफ करने का कार्य शुरू नहीं किया है। मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार रविवार होने की वजह से आज (28 जून) मलबा साफ करने का काम नहीं किया जा रहा है। मलबा साफ होने के बाद ही SIT नमूना इकट्ठा करने का काम शुरू करेगी।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी तारातला में गोदाम की छत ढहने की घटना की जांच का आदेश दिया है। जांच अधिकारियों ने SIT का गठन भी किया है। SIT के अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है जिसमें लापरवाही का आरोप लगाते हुए इस हादसे के लिए KMC के अधिकारियों को भी जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
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news18 की मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि बिल्डिंग प्लान जमा होने के बाद अनुमोदन मिलने और अनुमोदन मिलने के बाद निर्माण कार्य के दौरान KMC के अधिकारी कई बार इसकी जांच करते हैं। लेकिन तारातला के निर्माण में ऐसा कुछ नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है।
बताया जाता है कि वार्ड के सब इंजीनियर से लेकर बोरो ऑफिस के एसिसटेंट इंजीनियर और एग्जिक्यूटिव इंजीनियर की निगरानी में यह निर्माण होना चाहिए था।
आरोप है कि ऐसा बिल्कुल नहीं किया गया। घटना की जांच कर रही पुलिस का आरोप है कि कालीचरण बंद्योपाध्याय ने अपना प्रभाव दिखाकर और रुपए लेनदेन की वजह से ही नियमों को ताक पर रखकर यह निर्माण कार्य किया जा रहा था।
बता दें, कालीचरण बंद्योपाध्याय KMC के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम का पूर्व ओएसडी था। तारातला में गोदाम हादसे में उसे गिरफ्तार किया जा चुका है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार तारातला गोदाम हादसे में अब तक 16 लोगों की मौत होने की आधिकारिक तौर पर पुष्टि हो चुकी है। वहीं कई लोग अभी भी अस्पताल में इलाजरत हैं जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बतायी जाती है।