हुगली जिले की 4 क्षेत्रीय उत्पादों को भारत सरकार ने GI (ज्योग्राफिकल इंडिकेशन) टैग प्रदान किया है। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद जिले की एक या दो नहीं बल्कि 4 उत्पादों को जीआई टैग मिलने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ कारीगर भी बेहद खुश हैं।
हुगली में चंदननगर की जलभरा संदेश, बलागढ़ के नाव कलाकारी, जनाई के मनोहरा (मिठाई) और बेगमपुर की साड़ी को जीआई टैग प्रदान किया गया है। बता दें, पश्चिम बंग दिवस पर तारकेश्वर में प्रधानमंत्री नरेंद्र को भी जलभरा का स्वाद चखाया गया था।
इस बारे में नेशनल ज्यूडिशियल साइंस यूनिवर्सिटी के पूर्व चेयर प्रोफेसर पिनाकी घोष ने बताया कि हुगली के बेगमपुर की साड़ी, जनाई के मनोहरा, बलागढ़ के नाव कलाकारी को जीआई टैग प्रदान किया गया है। चंदननगर का जलभरा संदेश सिर्फ मिठाई नहीं बल्कि यह राज्य की पहचान है।
इसका नाम देशभर में फैला हुआ है। चंदननगर के मिठाई दुकान के मालिक शैवाल मोदक ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में व्यवसाय के लिए चंदननगर के जलभरा संदेश को जीआई टैग मिलना बेहद जरूरी था।
उन्होंने बताया कि सितंबर 2022 को हमने जीआई टैग के लिए आवेदन किया था। 4 सालों बाद इसे स्वीकृति मिली है। साथ ही उन्होंने कहा कि चंदननगर में सूर्य मोदक की एक मूर्ति स्थापित करने का अनुरोध भी विधायक से की है। वहीं दूसरी ओर बलागढ़ के डेंगी नाव कई सौ सालों पुरानी कलाकारी है।
बताया जाता है कि शुरुआत में जो नाव यहां बनाएं जाते थे, उनमें कांटी का प्रयोग नहीं किया जाता था। इसके बदले में एक लकड़ी के साथ दूसरी लकड़ी को जोड़ने की कारीगरी की जाती थी। हालांकि बाद में इसमें कांटी का इस्तेमाल किया जाने लगा।
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बलागढ़ की नाव कलाकारी समिति के सचिव उत्पल बारिक ने बताया कि मुख्य रूप से हमारी नावों का इस्तेमाल मछुआरे करते हैं। मछुआरे आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं, जिस वजह से नाव का उपयुक्त मूल्य हमें भी नहीं मिल पाता है।
बलागढ़ के विधायक व राज्य की मंत्री सुमना सरकार ने कहा कि नाव कलाकारों की लंबे समय से मांग थी जिसे पूरा किया गया। भाजपा सरकार ने अपना वादा पूरा किया। लोगों ने हमपर भरोसा किया जिसके लिए हम गौरवांवित हैं। इसके लिए मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को धन्यवाद देते हैं।