कोलकाताः पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 'वंदे मातरम्' को लेकर बड़ा संदेश देते हुए कहा कि सरकारी कार्यक्रमों में केवल सम्मान के लिए खड़े होना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि जब 'वंदे मातरम्' गाया जाए, तब सभी को उसके बोलों के साथ अपने होंठ भी हिलाने चाहिए। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि 'वंदे मातरम्' के प्रति किसी भी प्रकार का अनादर उनकी सरकार बर्दाश्त नहीं करेगी।
कोलकाता के रवींद्र सदन में 'सिटिज़न एमपावरमेंट फोरम' की ओर से बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की अमर रचना 'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार बनने के बाद 'वंदे मातरम्' को सभी शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों में प्रार्थना गीत के रूप में लागू किया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकारी निर्देश का पालन करते हुए लोग कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम्' के दौरान अपनी सीट से उठकर खड़े तो हो जाते हैं, लेकिन कई लोग जानबूझकर गीत के बोल नहीं दोहराते और उनके होंठ नहीं हिलते। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह स्थिति बदलनी होगी। उन्होंने कहा, "सिर्फ खड़े रहना काफी नहीं है। 'वंदे मातरम्' गाते समय होंठ भी हिलने चाहिए। इसमें थोड़ा समय लग सकता है, लेकिन हमारी सरकार इसे भी सुनिश्चित करेगी। जनता ने हम पर जो भरोसा जताया है, उसे पूरा करना हमारी जिम्मेदारी है।"
अपने संबोधन में शुभेंदु अधिकारी ने राज्य में राष्ट्रविरोधी गतिविधियों पर भी कड़ा रुख अपनाने का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की धरती का इस्तेमाल अब किसी भी राष्ट्रविरोधी गतिविधि के लिए नहीं होने दिया जाएगा। सरकार ऐसे किसी भी प्रयास को सख्ती से रोकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में सेना और देश का अपमान करने वालों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि उनकी सरकार लैंड जिहाद, लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून लाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने लोगों से थोड़ा समय देने की अपील करते हुए भरोसा दिलाया कि इन मुद्दों पर सरकार जल्द ठोस कदम उठाएगी।
इधर, जादवपुर विश्वविद्यालय के त्रिगुणा सेन ऑडिटोरियम में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की जयंती भी मनाई गई। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर. एन. रवि ने वर्तमान पीढ़ी तक बंकिमचंद्र के विचारों और 'वंदे मातरम्' के संदेश को पहुंचाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।
राज्यपाल ने कहा कि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का जन्म ऐसे समय हुआ था, जब देश कठिन दौर से गुजर रहा था। उन्होंने उन्हें एक महान ऋषि बताते हुए कहा कि उनका जीवन देशवासियों में राष्ट्रीय चेतना जगाने के लिए समर्पित था। राज्यपाल के अनुसार, बंकिमचंद्र की रचना 'वंदे मातरम्' ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा और प्रेरणा दी। यह गीत भाषा, क्षेत्र और जाति की सीमाओं से ऊपर उठकर पूरे देश में स्वतंत्रता और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बन गया।