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महंगे गिफ्ट नहीं, पार्टनर का हाल-चाल पूछ लेना ही काफी है - क्या है नई पीढ़ी का ‘रोमांटिक मिनिमलिज्म’?

रिश्तों की गहराई को दिखाने के लिए दिखावा नहीं बल्कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतें ही काफी होती है।

By Moumita Bhattacharya

Jun 26, 2026 19:32 IST

फिल्मों जैसी भव्यता या दिखावटी विलासिता नहीं बल्कि Gen Z और मिलेनियल्स छोटी-छोटी चीजों में प्यार की तलाश कर रहे हैं। इन्हें महंगे गिफ्ट्स या दिखावा नहीं बल्कि रोजमर्रा की छोटी चीजों में प्यार की तलाश करते हैं। रिश्तों के इस नए ट्रेंड को ‘रोमांटिक मिनिमलिज्म’ कहा जा रहा है।

एक भारतीय डेटिंग ऐप के हालिया सर्वे में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। देश के मेट्रो शहरों से लेकर छोटे शहरों तक लगभग 53 प्रतिशत युवा अब ‘कम लेकिन अर्थपूर्ण’ रिश्तों में विश्वास रखते हैं। वहीं 38 प्रतिशत से अधिक लोग दिखावे वाले प्यार और सोशल मीडिया पर फोटो पोस्ट करने की दौड़ से दूरी बनाना चाहते हैं।

डेटिंग ऐप के अधिकारियों का कहना है कि युवा पीढ़ी में रोमांस की चाहत कम नहीं हुई है, बल्कि उन्होंने यह समझ लिया है कि रिश्तों की असली नींव क्या होती है। आज के युवा बड़े-बड़े वादों की बजाय मानसिक शांति और ईमानदारी को अधिक महत्व दे रहे हैं।

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क्या है ‘रोमांटिक मिनिमलिज्म’?

सीधे शब्दों में कहें तो यह एक ऐसी मानसिकता है जिसमें रिश्तों की गहराई को दिखाने के लिए दिखावा नहीं बल्कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतें ही काफी होती है। कई लोग सोचते हैं कि ‘मिनिमलिज्म’ का मतलब है उम्मीदें कम कर देना या किसी तरह समझौता करना।

लेकिन 41 प्रतिशत युवाओं ने साफ कहा है कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। यह वास्तव में अपने स्टैंडर्ड को बदलने की बात है - जहां दिखावा से ज्यादा यह देखा जाता है कि रिश्ते की बुनियाद कितनी मजबूत और सच्ची है।

Image : Ei Samay

क्यों अचानक बढ़ा यह ट्रेंड?

आज की व्यस्त जीवनशैली भी इसका एक बड़ा कारण है। बड़े शहरों के 22 प्रतिशत युवाओं ने बताया कि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी इतनी व्यस्त और थकाऊ हो गई है कि रिश्तों के नाम पर होने वाला ड्रामा झेलने की ऊर्जा ही नहीं बचती।

आज बहुत प्यार दिखाना और अगले ही दिन अचानक गायब हो जाना जैसी लुका-छिपी वाली स्थिति मानसिक रूप से और ज्यादा थका देती है। इसी वजह से लोग अब शांत, स्थिर और भरोसेमंद रिश्तों की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं।

प्यार की नई परिभाषा

सर्वे में पाया गया है कि 55 प्रतिशत महिलाएं मानती हैं कि अचानक किसी दिन रेस्तरां में डेट पर जाने से ज्यादा कीमती यह होता है कि पार्टनर रोज नियमित रूप से थोड़ा हाल-चाल लेता रहे।

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वहीं 30 से 35 वर्ष की उम्र के 42 प्रतिशत पुरुषों ने कहा कि वे महंगे उपहारों की बजाय अपने पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम बिताना ज्यादा पसंद करते हैं। आज के समय में यह देखा जा रहा है कि आपका प्रिय व्यक्ति आपकी छोटी-छोटी पसंद-नापसंद का कितना ध्यान रखता है - यही अब प्यार की नई परिभाषा बन गई है।

पॉकेट पर दबाव या मानसिक शांति?

आर्थिक दबाव, मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती जागरूकता और समय की कमी - ये तीनों कारण मिलकर 2026 में इस ट्रेंड को और भी लोकप्रिय बना रहे हैं। सर्वे में शामिल 10 में से 6 लोगों ने बताया कि अच्छा डेट मतलब महंगे रेस्तरां में जाकर पैसे खर्च करना नहीं है, बल्कि एक-दूसरे के साथ मौजूद रहना और कुछ सुंदर पलों को साझा करना है।

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