वायनाड: अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं के दान की कथित हेराफेरी का मामला अब राजनीतिक रूप से भी गरमा गया है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस पूरे प्रकरण को बेहद दुखद और शर्मनाक बताते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से निष्पक्ष और गहन जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने दान एकत्र किया और उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाली, उनकी जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।
दान की सुरक्षा की जिम्मेदारी तय करने की मांग
वायनाड कलेक्ट्रेट में एक बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ राम मंदिर के लिए दान दिया था। यदि उन दानराशियों में कथित गड़बड़ी हुई है तो यह बेहद दुखद और शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर यह घटना कैसे हुई, किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। मामले की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए व्यापक जांच कराई जानी चाहिए।
'आम लोगों ने अपनी बचत से दिया था दान'
कांग्रेस सांसद ने कहा कि राम मंदिर के लिए केवल बड़ी कंपनियों ने ही नहीं, बल्कि देशभर के आम नागरिकों ने भी अपनी श्रद्धा के अनुसार योगदान दिया था। महिलाओं ने अपनी घरेलू बचत से दान दिया, गरीब लोगों ने भी अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग किया और पूरे देश में दान संग्रह अभियान चलाया गया था। उन्होंने कहा कि जब लोगों से दान एकत्र किया गया, तब उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित लोगों की जिम्मेदारी भी थी। यदि दान की राशि में गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदार लोगों को जवाब देना होगा।
7 जून को सामने आया था मामला
राम मंदिर में प्राप्त दानराशि के कथित गबन का विवाद 7 जून को सार्वजनिक हुआ था। इसके बाद 13 जून को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी थी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई शुरू की गई।
एसआईटी की सिफारिश पर दर्ज हुई एफआईआर
एसआईटी की सिफारिशों के आधार पर 25 जून की रात एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद अयोध्या पुलिस ने शुक्रवार को आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि की। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में कड़ी और सख्त सिफारिशें की हैं। अधिकारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मामले को लेकर बेहद गंभीर हैं और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आठों अभियुक्त न्यायिक हिरासत में भेजे गए
मंदिर में प्राप्त दानराशि के कथित गबन के मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को अदालत ने 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।