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अमृतसर में बीबी जागीर कौर का बयान: सिख समुदाय में एकता और अकाल तख्त की गरिमा पर जोर

बीबी जागीर कौर ने जत्थेदारों से राजनीतिक दबाव से दूर रहने की अपील की

By प्रियंका महतो

Jun 27, 2026 13:54 IST

चंडीगढ़ : पंजाब के अमृतसर में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की पूर्व अध्यक्ष बीबी जागीर कौर ने सिख समुदाय में एकता बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि समुदाय के भीतर चल रहे विभाजन और विवादों को समाप्त किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब भी जत्थेदार एकत्र हो उनका उद्देश्य केवल सिख पंथ की भलाई और एकता को मजबूत करना होना चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब का उपयोग व्यक्तिगत या राजनीतिक लड़ाइयों के लिए नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे इसकी गरिमा और अधिकार को ठेस पहुंचती है।

बीबी जागीर कौर ने कहा कि हाल ही में जो विवाद सामने आया है, वह किसी व्यक्ति के कथित अनैतिक आचरण से जुड़ा है और इसे श्री अकाल तख्त साहिब या किसी पंथिक मुद्दे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत या राजनीतिक विवादों को पंथ के नाम पर आगे बढ़ाना सिख संस्थाओं की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि वास्तविक पंथिक मुद्दे वे हैं जिनमें सरकार द्वारा सिख संस्थाओं में हस्तक्षेप, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनावों में देरी और गुरुद्वारों व सिख तख्तों में हस्तक्षेप शामिल है। ऐसे मुद्दों के खिलाफ संगठित विरोध होना चाहिए।

उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीतिक दलों को अपनी राजनीतिक लड़ाइयां अलग से लड़नी चाहिए, विशेषकर जब पंजाब में आगामी चुनाव नजदीक हैं, लेकिन धार्मिक संस्थाओं को राजनीतिक संघर्षों से दूर रखा जाना चाहिए।

बीबी जागीर कौर ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जत्थेदार द्वारा दिया गया प्रत्येक शब्द सिख समुदाय के लिए आदेश के समान माना जाता है, इसलिए ऐसे निर्णय बहुत सावधानी और जिम्मेदारी के साथ लिए जाने चाहिए।

उन्होंने 2 दिसंबर 2024 के हुकमनामा का उल्लेख करते हुए कहा कि सिख समुदाय ने उसे पूरी तरह स्वीकार किया था, लेकिन यह भी जोड़ा कि यदि कोई हुकमनामा पंथ द्वारा स्वीकार नहीं किया जाता, तो उसका महत्व कम हो जाता है।

उन्होंने गुरमीत राम रहीम सिंह से जुड़े विवाद का भी जिक्र किया और कहा कि पहले जारी किया गया हुकमनामा, जो उनसे संबंधित था, उसे पुनर्विचार करना पड़ा क्योंकि उसे सिख समुदाय ने स्वीकार नहीं किया था।

अंत में उन्होंने जत्थेदारों को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें सतर्क रहना चाहिए और किसी भी राजनीतिक दबाव में नहीं आना चाहिए। उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब की गरिमा, सम्मान और पवित्रता को बनाए रखने पर जोर दिया।

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