भुवनेश्वर : ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की देवस्नान पूर्णिमा और ‘स्नान यात्रा’ के मद्देनजर भारी भीड़ को देखते हुए ओडिशा पुलिस ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी है। 29 जून को होने वाले इस धार्मिक आयोजन में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है, जिसके चलते प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस वर्ष लगभग तीन से चार लाख श्रद्धालुओं के पुरी पहुंचने की उम्मीद है। भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और सुदर्शन की स्नान यात्रा को लेकर पूरे शहर में सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के विशेष इंतजाम किए गए हैं।
सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर की। इनमें पुलिस महानिरीक्षक (मध्य क्षेत्र) सत्यजीत नायक और पुरी के पुलिस अधीक्षक प्रतीक सिंह शामिल रहे, जिन्होंने सभी तैयारियों का विस्तार से निरीक्षण किया और शांतिपूर्ण आयोजन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
ओडिशा पुलिस ने इस अवसर पर 79 प्लाटून बल की तैनाती की है। इसके साथ ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और विशेष इकाइयों को भी तैनात किया गया है ताकि भीड़ प्रबंधन बेहतर तरीके से किया जा सके। सुरक्षा व्यवस्था में क्विक एक्शन टीम (क्यूएटी), स्निफर डॉग्स, छतों पर निगरानी दल और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) के माध्यम से रीयल-टाइम मॉनिटरिंग शामिल है।
यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए विशेष योजना तैयार की गई है। श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग पार्किंग जोन बनाए गए हैं तथा आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली और सहायता केंद्र भी स्थापित किए गए हैं, ताकि भीड़भाड़ और अव्यवस्था से बचा जा सके।
देवस्नान पूर्णिमा, जिसे स्नान यात्रा भी कहा जाता है, हिंदू पंचांग के ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा को मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसे भगवान जगन्नाथ का जन्मदिवस भी माना जाता है। इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को मंदिर के गर्भगृह से बाहर लाकर स्नान मंडप में लाया जाता है, जहां 108 कलशों के पवित्र जल से उनका विधिवत स्नान कराया जाता है।
स्नान के बाद भगवानों को ‘गजवेश’ या ‘हाति बेशा’ धारण कराया जाता है, जिसमें उन्हें हाथी के स्वरूप में सजाया जाता है। इस अनोखी परंपरा का गहरा धार्मिक महत्व माना जाता है। इसके बाद मान्यता है कि अत्यधिक स्नान के कारण देवता अस्वस्थ हो जाते हैं और उन्हें 15 दिनों के लिए ‘अनवसर’ नामक एकांत में रखा जाता है।
अनवसर अवधि में भगवानों को विशेष औषधीय ‘फुलुरी तेल’ अर्पित किया जाता है ताकि उनकी ‘स्वास्थ्य लाभ’ प्रक्रिया पूरी हो सके। इस दौरान श्रद्धालु प्रत्यक्ष मूर्तियों के दर्शन नहीं कर पाते, बल्कि ‘पट्टी दीआन’ (चित्रित प्रतिमाओं) के दर्शन करते हैं।
अनवसर समाप्त होने के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा भव्य रथ यात्रा के लिए पुनः प्रकट होते हैं। इस दौरान उन्हें विशाल रथों पर बैठाकर पुरी की सड़कों पर निकाला जाता है और वे गुंडिचा मंदिर की यात्रा करते हैं।
यह आयोजन देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं के बीच अत्यंत महत्वपूर्ण और लोकप्रिय धार्मिक उत्सव माना जाता है। स्नान यात्रा और रथ यात्रा के बीच की अवधि में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं और इस पवित्र अवसर का हिस्सा बनते हैं।