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अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो बोले- फ्रेमवर्क समझौता दोनों देशों को शांति की राह पर ले जाएगा

महीनों के संघर्ष के बाद इजरायल-लेबनान में शांति पहल, अमेरिका की मौजूदगी में हुआ अहम समझौता

By श्वेता सिंह

Jun 27, 2026 01:22 IST

वॉशिंगटनः मध्य पूर्व में महीनों से जारी तनाव के बीच इजरायल और लेबनान ने अमेरिका की मध्यस्थता में एक फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे दोनों देशों के बीच स्थायी शांति की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम बताया। हालांकि समझौते के विस्तृत प्रावधान सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

इस समझौते पर अमेरिका में इजरायल के राजदूत येचिएल लेइटर और लेबनान की राजदूत नादा हमादेह ने हस्ताक्षर किए।

लेबनान ने कहा- संप्रभुता बहाल करने की शुरुआत

नादा हमादेह ने कहा कि यह समझौता लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की बहाली की दिशा में पहला कदम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे स्थायी युद्धविराम का रास्ता खुलेगा, विस्थापित लोग अपने घर लौट सकेंगे और देश में शांति, सुरक्षा तथा समृद्धि का माहौल बनेगा।

इजरायल बोला- अब असली शांति की राह खुलेगी

इजरायल के राजदूत येचिएल लेइटर ने कहा कि इस फ्रेमवर्क का अंतिम लक्ष्य दोनों देशों के बीच वास्तविक और स्थायी शांति स्थापित करना है। उनके अनुसार, इस त्रिपक्षीय व्यवस्था में ईरान और हिजबुल्लाह की कोई भूमिका नहीं होगी तथा दोनों देशों की संप्रभुता और सुरक्षा का सम्मान सुनिश्चित किया जाएगा।

कैसे बढ़ा था संघर्ष?

ताजा संघर्ष तब शुरू हुआ जब 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू होने के कुछ दिन बाद हिजबुल्लाह ने इजरायल पर रॉकेट दागे। इसके जवाब में इजरायल ने लेबनान में सैन्य कार्रवाई तेज करते हुए कई इलाकों में अपनी मौजूदगी बढ़ाई।

मार्च से अब तक इजरायली हमलों में लेबनान में 4,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, लेबनान और उत्तरी इजरायल में संघर्ष के दौरान कम से कम 37 इजरायली सैनिक भी मारे गए हैं।

संघर्ष विराम पर अब भी बनी चुनौती

हाल के दिनों में दोनों पक्षों के बीच हिंसा में कुछ कमी आई थी, लेकिन इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर फिर कई हमले किए, जिससे संघर्ष विराम की संभावनाओं पर सवाल उठने लगे।

गौरतलब है कि इस वार्ता प्रक्रिया में हिजबुल्लाह शामिल नहीं था। इससे पहले भी कई बार संघर्ष विराम के समझौते हुए, लेकिन उनका प्रभावी पालन नहीं हो सका।

दोनों पक्षों की अलग-अलग प्राथमिकताएं

लेबनान की प्राथमिकता दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेना की वापसी सुनिश्चित करना है। वहीं, इजरायल की मुख्य मांग ईरान समर्थित हिजबुल्लाह का निरस्त्रीकरण है।

लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने हाल ही में कहा था कि दक्षिणी लेबनान में ऐसे 'पायलट जोन' बनाने के प्रस्ताव पर चर्चा चल रही है, जहां इजरायली सेना की वापसी के बाद केवल लेबनानी सेना की तैनाती होगी। हालांकि इसके लिए अभी इजरायल की मंजूरी मिलना बाकी है।

हिजबुल्लाह के रुख से बनी हुई है अनिश्चितता

इजरायल के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, वार्ता में दक्षिणी लेबनान से इजरायली सैनिकों की चरणबद्ध वापसी और हिजबुल्लाह के हथियार छोड़ने जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। हालांकि हिजबुल्लाह पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह पूरे लेबनान में हथियार छोड़ने के पक्ष में नहीं है। संगठन का कहना है कि पूर्व समझौतों और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के तहत केवल लितानी नदी के दक्षिणी क्षेत्र में ही उसके निरस्त्रीकरण का प्रावधान है।

फिलहाल यह फ्रेमवर्क समझौता शांति की दिशा में एक शुरुआती पहल माना जा रहा है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता आगे होने वाली वार्ताओं और जमीन पर समझौते के पालन पर निर्भर करेगी।

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