वाशिंगटन : पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक मालवाहक जहाज पर हमले का आरोप ईरान पर लगा है। यह घटना ऐसे समय हुई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर बातचीत चल रही थी। हालांकि हमले को लेकर अभी तक ईरान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार सिंगापुर के झंडे वाला ‘एवर लवली’ नामक जहाज हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजर रहा था। इसी दौरान ओमान के दाहिट बंदरगाह से करीब 7.5 समुद्री मील दक्षिण-पूर्व में अचानक जहाज पर मिसाइल से हमला हुआ।
ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा संगठन यूकेएमटीओ (यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस) ने दावा किया कि इस हमले में जहाज को काफी नुकसान पहुंचा है। हालांकि अभी तक किसी के घायल होने या मौत की कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक यह हमला हॉर्मुज जलडमरूमध्य में किसी जहाज पर शांति वार्ता के बाद हुई पहली बड़ी घटना है। इससे क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं।
हालांकि इस घटना पर ईरान ने अब तक कोई सीधा बयान जारी नहीं किया है। इससे पहले ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने चेतावनी दी थी कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवाजाही के लिए जहाजों को ईरान द्वारा निर्धारित मार्गों का पालन करना होगा। ऐसा नहीं करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी।
ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या सिंगापुर के झंडे वाले जहाज ने ईरान के निर्देशों का पालन नहीं किया और इसी वजह से उसे निशाना बनाया गया। हालांकि इस बारे में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त बयान दिया है। व्हाइट हाउस में किसानों के साथ आयोजित एक कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान को पूरी तरह कमजोर कर दिया है और अब उसकी बातचीत करने की स्थिति मजबूत है।
डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान समझौता करने के लिए इच्छुक है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की स्थिति मजबूत है और उसकी बातचीत की क्षमता भी बढ़ी है।
वहीं स्विट्जरलैंड में शांति समझौते को लेकर हुई बातचीत में कोई अंतिम सहमति नहीं बन पाई। बैठक में ईरान के प्रतिनिधियों के साथ अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) और जेडी वेंस भी मौजूद थे।
हालांकि बातचीत से कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान के बाजार में अमेरिकी कृषि उत्पादों की बिक्री की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि एक नया बाजार सामने आ रहा है और ईरान एक महत्वपूर्ण देश हो सकता है।