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पीओके में बगावत, सेना हटाने को 24 घंटे का अल्टीमेटम जारी

ख्वाजा आसिफ के बयान से बढ़ा विवाद, कश्मीरी पहचान पर छिड़ी बहस

नई दिल्ली/इस्लामाबाद : पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में हालात एक बार फिर बेहद तनावपूर्ण हो गए है, जहां नागरिक आंदोलन और पाकिस्तानी प्रशासन के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों की तैनाती को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए पाकिस्तान रेंजर्स और सेना को क्षेत्र छोड़ने के लिए 24 घंटे का अंतिम अल्टीमेटम दे दिया है। इस बीच कश्मीर मुद्दे पर पाक सरकार के बयान को लेकर कूटनीतिक विवाद भी तेज हो गया है।

प्रदर्शनकारी नागरिक संगठन ज्वाइंट आवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने मंगलवार को चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर पाक रेंजर्स और सेना ने पीओके नहीं छोड़ा, तो स्थिति हिंसक टकराव की ओर बढ़ सकती है और इसके परिणामों की पूरी जिम्मेदारी पाकिस्तान सरकार और सेना पर होगी।

रावलकोट में आयोजित एक बड़ी सभा में जेएएसी नेता सरदार अमान कश्मीरी ने कहा कि यह भूमि स्थानीय लोगों की है और उनकी मांगों को अनदेखा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी शांति चाहते है, लेकिन यदि उनकी बात नहीं मानी गई तो गंभीर संघर्ष की स्थिति बन सकती है। उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर के सामने दो विकल्प रखते हुए कहा कि या तो मांगें स्वीकार कर शांति बहाल करें या फिर संघर्ष के लिए तैयार रहें।

इसी बीच भारत ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी है। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पीओके में अशांति के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की थी, जिसके जवाब में भारत ने स्पष्ट किया कि यह आरोप वास्तविकता से ध्यान भटकाने का प्रयास है। भारत का कहना है कि पाकिस्तान सरकार वर्षों से क्षेत्र में आर्थिक शोषण और प्रशासनिक दमन करती रही है और उसी का परिणाम अब सामने आ रहा है।

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि लंबे समय से सुनियोजित तरीके से पीओके में आर्थिक शोषण हुआ है, लोगों के मौलिक अधिकार छीने गए हैं और अवैध कब्जे की नीति अपनाई गई है। उनके अनुसार यही कारण है कि आज वहां जनता का आक्रोश फूट पड़ा है।

वहीं पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के एक अन्य बयान ने भी विवाद को और बढ़ा दिया है। उन्होंने रावलकोट और मीरपुर जैसे क्षेत्रों में प्रदर्शन कर रहे लोगों की पहचान पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे “वास्तविक कश्मीरी नहीं हैं” क्योंकि वे पोतोहारी और पहाड़ी भाषाएं बोलते हैं। इस बयान के बाद पीओके के कई इलाकों में व्यापक विरोध हुआ और प्रदर्शनकारियों ने उनका पुतला भी जलाया।

अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ अयनजीत सेन ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पाकिस्तान के दावे के विपरीत यह क्षेत्र भारत का हिस्सा है और पाकिस्तान इसे नियंत्रित कर रहा है। उनके अनुसार भाषा के आधार पर पहचान तय करना कश्मीर की ऐतिहासिक और क्षेत्रीय वास्तविकता को सरल बनाकर प्रस्तुत करने का प्रयास है जो स्वीकार्य नहीं है।

इधर पीओके में आंदोलन लगातार तेज हो रहा है। मंगलवार को रावलकोट, मीरपुर सहित कई शहरों में बड़े पैमाने पर रैलियां निकाली गईं, जिनमें महिलाओं और बच्चों की भी बड़ी संख्या में भागीदारी देखी गई। यह आंदोलन का नया और उल्लेखनीय पहलू माना जा रहा है।

जेएएसी द्वारा दी गई पिछली समयसीमा मंगलवार को समाप्त हो गई थी, जिसके बाद संगठन ने फिर से 24 घंटे का अल्टीमेटम जारी किया है। इसमें मांग की गई है कि क्षेत्र से पाक रेंजर्स की पूरी टुकड़ी, सेना के सभी अतिरिक्त जवान और अतिरिक्त पुलिस बल तुरंत हटाया जाए। संगठन का कहना है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और उग्र हो सकता है। पूरे घटनाक्रम के बीच पीओके में तनाव बढ़ता जा रहा है और राजनीतिक व कूटनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

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