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डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ही डेटा को बताया गलत, भारत टैरिफ पर मचा विवाद

नई किताब में दावा: ट्रंप ने भारत पर 175% टैरिफ का माना गलत आंकड़ा

नई दिल्ली/वॉशिंगटन : अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापारिक फैसलों और भारत पर टैरिफ को लेकर उनके भीतर पैदा हुए असंतोष पर एक नई किताब में कई अहम दावे सामने आए हैं। इन खुलासों में यह बताया गया है कि ट्रंप अपने ही प्रशासन द्वारा पेश किए गए आंकड़ों को भी स्वीकार करने से इनकार कर देते थे और बार-बार उन्हें “गलत जानकारी” करार देते थे।

अमेरिकी पत्रकार मैगी हैबरमैन और जॉनाथन स्वान की पुस्तक “रेजिम चेंज: इनसाइड द इम्पीरियल प्रेसीडेंसी ऑफ डोनाल्ड ट्रंप” में दावा किया गया है कि ट्रंप का विश्वास था कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर 175 प्रतिशत तक टैरिफ लगाता है। इसी धारणा के आधार पर उन्होंने वैश्विक व्यापार नीति में कड़े बदलावों की दिशा तय की।

पुस्तक के अनुसार पिछले वर्ष अप्रैल में ट्रंप ने नई टैरिफ नीति की घोषणा की थी, जिसे उन्होंने “लिबरेशन डे” नाम दिया था। इससे पहले हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में जब अधिकारियों ने भारत और चीन के टैरिफ से जुड़े आंकड़े प्रस्तुत किए, तो ट्रंप ने उन्हें खारिज कर दिया और कहा कि उन्हें सही जानकारी नहीं दी जा रही है तथा सब गलत जानकारी है।

इसके बाद जब अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने आधिकारिक डेटा प्रस्तुत किया, तब भी ट्रंप संतुष्ट नहीं हुए। वे बार-बार यह दोहराते रहे कि भारत वास्तविक से कहीं अधिक टैरिफ लगाता है और उन्हें असली तस्वीर नहीं दिखाई जा रही। इसी पृष्ठभूमि में अमेरिकी प्रशासन की ओर से यह धारणा भी बनने लगी कि भारत कृषि उत्पादों पर अधिक शुल्क लगाता है। इसी कारण ट्रंप के करीबी व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने भारत को “टैरिफ का महाराजा” तक कह दिया था।

इसके बाद 2 अप्रैल 2025 को ट्रंप प्रशासन ने “लिबरेशन डे” टैरिफ नीति की औपचारिक घोषणा की। इस नीति का उद्देश्य उन देशों पर जवाबी शुल्क लगाना था जो अमेरिकी उत्पादों पर उच्च टैरिफ लगाते हैं। इसके तहत भारत से आने वाले कई उत्पादों पर 25 प्रतिशत शुल्क लागू किया गया।

कुछ महीनों बाद रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर अमेरिका ने भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ और लगा दिया। इसके परिणामस्वरूप कई भारतीय उत्पादों पर कुल शुल्क बढ़कर 50 प्रतिशत तक पहुंच गया।

ट्रंप प्रशासन का दावा था कि भारत रूस से तेल खरीदकर उसकी अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है और इससे रूस को यूक्रेन युद्ध जारी रखने में मदद मिल रही है। भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उसकी प्राथमिकता देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है और वह अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों के अनुसार ही तेल आयात का निर्णय लेता है।

इसके बाद लंबे समय तक चले तनाव, कूटनीतिक बातचीत और व्यापारिक वार्ताओं के बाद 2026 के फरवरी में भारत और अमेरिका ने एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा घोषित की। इस प्रस्ताव के तहत भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति बनी। साथ ही रूस से तेल आयात पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क को हटाने का निर्णय भी अमेरिका ने लिया।

इसके बदले भारत ने भी कई अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम करने पर सहमति जताई। हालांकि अब तक इस समझौते की सभी शर्तें पूरी तरह लागू नहीं हुई हैं और दोनों देशों के बीच अंतिम सहमति के लिए बातचीत जारी है।

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