हावड़ाः हावड़ा जिले के जगतबल्लभपुर की रहने वाली 27 वर्षीय अनामिका सामंत के घर बुधवार को वह लौटीं, लेकिन जीवित नहीं, बल्कि ताबूत में। लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड में उसकी मौत के बाद जब उसका शव पैतृक गांव गरबलिया पहुंचा तो पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और परिचित उसके घर पहुंचे।
अनामिका लखनऊ के अलीगंज इलाके में स्थित 'हेड हॉपर स्टूडियो' में कार्यरत थीं। यह स्टूडियो एक बहुमंजिला इमारत की दूसरी मंजिल पर संचालित होता था। सोमवार को इसी इमारत में अचानक आग लग गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आग सबसे पहले भूतल पर स्थित एक पालतू जानवर बेचने वाली दुकान में लगी थी। देखते ही देखते आग ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया और ऊपर मौजूद लोगों के बाहर निकलने का रास्ता बंद हो गया।
इस हादसे ने सिर्फ एक जान नहीं ली, बल्कि दो परिवारों के सपनों को भी राख कर दिया। स्टूडियो में काम करने वाले 28 वर्षीय नीलेश कुमार और अनामिका की नवंबर में शादी तय थी। दोनों परिवार विवाह की तैयारियों में जुटे थे और खुशियों का इंतजार कर रहे थे। लेकिन आग की इस त्रासदी ने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी। हादसे में अनामिका और नीलेश, दोनों की मौत हो गई।
सोमवार शाम हादसे की खबर अनामिका के परिवार तक पहुंची। हालांकि उनका पैतृक घर हावड़ा के जगतबल्लभपुर में है, लेकिन वह अपने माता-पिता के साथ कोलकाता के न्यू अलीपुर इलाके में रहती थीं। सूचना मिलते ही परिवार लखनऊ रवाना होने की तैयारी में जुट गया, लेकिन रात में यात्रा संभव नहीं हो सकी। इसके बाद मंगलवार सुबह उनके माता-पिता, भाई और चाचा लखनऊ पहुंचे।
परिवार सीधे हवाई अड्डे से शवगृह पहुंचा, जहां अनामिका की पहचान की गई। मृतका के चाचा ने बताया कि आग इतनी भयावह थी कि शरीर बुरी तरह झुलस गया था। पहचान करना बेहद कठिन था। काफी प्रयास के बाद परिवार के सदस्यों ने चेहरे के कुछ हिस्सों के आधार पर उनकी पहचान की।
बुधवार को जब अनामिका का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो माहौल बेहद भावुक हो गया। जिस घर में कुछ महीनों बाद शादी की तैयारियां होनी थीं, वहां अब मातम पसरा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरा गांव इस दुखद घटना से स्तब्ध है।