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आरजी कर मामले में न्याय का भरोसा, मुख्यमंत्री के आश्वासन पर रो पड़ीं 'अभया' की मां

'अभया' केस में कार्रवाई का आश्वासन, महिला अपराधों पर जीरो टॉलरेंस नीति दोहराई; तमन्ना खातून और अन्य मामलों का भी किया जिक्र।

By श्वेता सि्ंह

Jun 23, 2026 23:44 IST

कोलकाताः पश्चिम बंगाल विधानसभा में मंगलवार को एक ऐसा क्षण आया जिसने पूरे सदन को भावुक कर दिया। आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की महिला डॉक्टर से दुष्कर्म और हत्या के मामले पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पीड़िता को न्याय दिलाने का भरोसा दिया। यह सुनकर सदन में मौजूद ‘अभया’ की मां और भाजपा विधायक रत्ना देबनाथ अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सकीं और उनकी आंखें नम हो गईं।

‘अभया’ को न्याय दिलाने का वादा

राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि आरजी कर कांड में न्याय सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता ने बदलाव इसलिए चुना ताकि "अभया" को न्याय मिल सके। आंदोलन के दौरान मृतक डॉक्टर को प्रतीकात्मक रूप से "अभया" नाम दिया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामलों में सरकार की नीति पूरी तरह "जीरो टॉलरेंस" की है।

मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद रत्ना देबनाथ ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उनकी बेटी को न्याय मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह विधानसभा में किसी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए नहीं, बल्कि अपनी बेटी को इंसाफ दिलाने की लड़ाई के लिए मौजूद हैं। उनका बयान भी सदन के बाहर चर्चा का विषय बना रहा।

आरजी कर कांड ने पूरे देश को झकझोरा था

आरजी कर अस्पताल में 9 अगस्त 2024 को ड्यूटी पर तैनात 31 वर्षीय प्रशिक्षु महिला डॉक्टर का शव अस्पताल परिसर से बरामद हुआ था। जांच में दुष्कर्म और हत्या की पुष्टि हुई थी। इस घटना के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए और चिकित्सा समुदाय के साथ आम लोगों ने भी न्याय की मांग को लेकर आवाज उठाई थी।

सरकार ने गिनाईं अब तक की कार्रवाई

मुख्यमंत्री ने कहा कि मामले में जवाबदेही तय करने की दिशा में कई कदम उठाए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि तीन आईपीएस अधिकारियों को निलंबित किया गया है। साथ ही अस्पताल के तत्कालीन प्राचार्य डॉ. संदीप घोष को भी पद से हटाया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मामले की हर परत की जांच की जा रही है और सच्चाई सामने लाई जाएगी।

इस मामले में सिविक वॉलंटियर संजय रॉय को मुख्य आरोपी मानते हुए दोषी करार दिया गया और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। हालांकि मामले में बड़ी साजिश और तथ्यों को छिपाने के आरोप लगातार उठते रहे हैं। इन्हीं सवालों के बीच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मामले की पुनः जांच शुरू की है, जिस पर पीड़ित परिवार और आम जनता की नजरें टिकी हैं।

तमन्ना खातून का भी हुआ जिक्र

मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में नदिया जिले की 13 वर्षीय तमन्ना खातून का मामला भी उठाया। उन्होंने कहा कि तमन्ना के परिवार को भी न्याय मिलेगा। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि महिला अपराधों और राजनीतिक हिंसा से जुड़े सभी मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है।

तमन्ना मामले को लेकर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। तृणमूल कांग्रेस विधायक अलीफा अहमद के भाषण के दौरान भाजपा विधायकों ने तमन्ना प्रकरण को लेकर नारेबाजी की। बाद में मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव जीतने के बाद हुई उस घटना को भुलाया नहीं जा सकता और दोषियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

पीड़ित परिवारों ने भी रखी अपनी मांग

तमन्ना खातून की मां, माकपा नेता मीनाक्षी मुखर्जी और विधायक मुस्तफिजुर रहमान ने विधानसभा में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच और शीघ्र न्याय की मांग की। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि मामले को संवेदनशीलता के साथ देखा जाएगा और आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाए जाएंगे।

इस दौरान छात्र नेता अनीस खान के पिता ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात की। अनीस खान की फरवरी 2022 में हावड़ा जिले के आमता स्थित अपने घर की दूसरी मंजिल से गिरकर मौत हो गई थी। इस मामले को लेकर भी लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। मुख्यमंत्री ने जांच की प्रगति पर चिंता जताते हुए कहा कि लंबित मामलों में न्याय सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।

न्याय के मुद्दे पर सरकार की परीक्षा

आरजी कर कांड, तमन्ना खातून और अनीस खान जैसे मामलों का विधानसभा में एक साथ उठना यह संकेत देता है कि नई सरकार न्याय और जवाबदेही के मुद्दे को प्राथमिकता देना चाहती है। हालांकि पीड़ित परिवारों और जनता की नजर अब केवल आश्वासनों पर नहीं, बल्कि उन ठोस कदमों पर है जो इन मामलों में न्याय की दिशा तय करेंगे।

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