मुंबई : मुंबई में महाराष्ट्र विधानमंडल का सत्र जारी रहने के बीच महा विकास आघाड़ी (एमवीए) के नेताओं ने बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के खिलाफ विधानसभा के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला और महंगाई को आम जनता पर बोझ बताया।
प्रदर्शन में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता सुनील प्रभु और अंबादास दानवे भी शामिल हुए। दोनों नेताओं ने एक बैनर के साथ विरोध जताया, जिस पर लिखा था— “महंगाई मुक्त राष्ट्र, भाजपा मुक्त भारत” यह प्रदर्शन मौजूदा विधानसभा सत्र के दौरान राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्मा गया।
विधानसभा के बाहर प्रदर्शन के साथ-साथ सोमवार को किसानों के कर्ज माफी के मुद्दे पर भी विपक्षी विधायकों ने महाराष्ट्र मानसून सत्र के पहले दिन जोरदार विरोध दर्ज कराया था। इस दौरान शिवसेना (यूबीटी) विधायक आदित्य ठाकरे, कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार सहित कई नेताओं ने नारेबाजी करते हुए सरकार से किसानों के 7/12 भूमि रिकॉर्ड को साफ करने की मांग उठाई थी। उनका आरोप था कि देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार किसानों की समस्याओं की अनदेखी कर रही है।
इसी बीच महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में औपचारिक रूप से शामिल कर लिया गया है। इन सांसदों में संजय हरिभाऊ जाधव, भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे, ओमप्रकाश भूपालसिंग निम्बालकर, संजय दीना पाटिल, संजय उत्तमराव देशमुख और नागेश बापूराव पाटिल आष्टिकर शामिल हैं।
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि वह कोई भी काम अधूरा नहीं छोड़ते और इस राजनीतिक कदम को उन्होंने “ऑपरेशन टाइगर” की सफलता बताया।
उधर, शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने पार्टी छोड़कर गए सांसदों पर लगातार निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर सवाल उठाते हुए कहा कि इन सांसदों की यात्राओं और चार्टर्ड विमान के खर्च का भुगतान कौन कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि “85 करोड़ रुपये, इस सांसद की कीमत जनता का पैसा लूटा जा रहा है चार्टर्ड प्लेन के लिए लाखों रुपये कौन दे रहा है?
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी संकेत दिया है कि वह जल्द ही पार्टी में चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम और हालिया टूट पर अपना पक्ष सार्वजनिक रूप से रखेंगे। पार्टी को इस समय बड़े राजनीतिक झटके का सामना करना पड़ रहा है, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।