बेंगलुरु : कर्नाटक में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के तहत लोकायुक्त पुलिस ने एक समन्वित छापेमारी में आठ सरकारी अधिकारियों के पास से ₹31.11 करोड़ की अवैध संपत्ति का खुलासा किया, जबकि बेंगलुरु में आबकारी अधिनियम उल्लंघन के मामले में तीन प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई दर्ज की गई।
कर्नाटक लोकायुक्त पुलिस ने 17 जून को जारी जानकारी में बताया कि 16 जून को एक साथ की गई राज्यव्यापी छापेमारी में 35 से अधिक स्थानों पर कार्रवाई की गई थी। यह अभियान उन अधिकारियों के खिलाफ चलाया गया था जिन पर अनुपातहीन संपत्ति (डीए) के मामले दर्ज थे। इस दौरान बेंगलुरु शहर, बेंगलुरु ग्रामीण, दावणगेरे, कलबुर्गी और चिक्कमगलुरु सहित कई जिलों में अधिकारियों के आवास, कार्यालय और उनके परिजनों के घरों की तलाशी ली गई।
लोकायुक्त के अनुसार बरामद संपत्ति में ₹22.73 करोड़ मूल्य की अचल संपत्तियाँ और ₹8.38 करोड़ मूल्य की चल संपत्तियाँ शामिल हैं। जांच में सामने आए अधिकारियों में कर्नाटक आवास बोर्ड (केएचबी) के बेंगलुरु स्थित टाउन प्लानिंग विभाग के अतिरिक्त निदेशक राजन्ना एस.एल. सबसे अधिक संपत्ति रखने वालों में पाए गए, जिनकी कुल संपत्ति ₹4.97 करोड़ आंकी गई। उनके पांच ठिकानों पर हुई तलाशी में तीन आवासीय स्थल, दो मकान, तीन एकड़ कृषि भूमि तथा लगभग ₹70 लाख मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण बरामद हुए।
इसी अभियान में कलबुर्गी में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधीक्षण अभियंता मानिक एस. कनकत्ते के पास ₹4.68 करोड़ की संपत्ति पाई गई, जिसमें पाँच भूखंड, तीन मकान, एक वाणिज्यिक परिसर और बैंक खातों में जमा ₹50 लाख शामिल हैं।
वहीं दूसरी ओर बेंगलुरु शहर के उत्तरी प्रभाग पुलिस ने आबकारी अधिनियम के उल्लंघन के खिलाफ विशेष अभियान चलाते हुए तीन शराब की दुकानों, बार और रेस्तरां पर मामले दर्ज किए हैं। यह कार्रवाई 22 जून 2026 को सुबह के शुरुआती घंटों से लेकर सुबह 10:00 बजे तक 13 पुलिस थानों की सीमा में वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में की गई।
इस अभियान के तहत पुलिस टीमों ने 133 प्रतिष्ठानों पर आकस्मिक निरीक्षण किया, जिनमें 69 वाइन शॉप और 64 बार एवं रेस्तरां शामिल थे। जांच के दौरान तीन प्रतिष्ठानों को आबकारी अधिनियम के नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया गया, जिसके बाद उनके खिलाफ मामले दर्ज किए गए।
यह पूरा अभियान बेंगलुरु शहर के पुलिस आयुक्त के मार्गदर्शन में संचालित किया गया, जबकि पश्चिम प्रभाग के संयुक्त पुलिस आयुक्त तथा बेंगलुरु उत्तरी प्रभाग के पुलिस उपायुक्त बी.एस. नेमगौड़ा (आईपीएस) के नेतृत्व में इसे अंजाम दिया गया। इस कार्रवाई में तीन सहायक पुलिस आयुक्त, 13 पुलिस थानों के निरीक्षक तथा अन्य पुलिस अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल रहे।