मुंबई : शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में जारी राजनीतिक हलचल के बीच पार्टी के बागी सांसद नागेश पाटिल आष्टीकर ने सोमवार को आधिकारिक तौर पर पार्टी छोड़ने के अपने फैसले की पुष्टि कर दी। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके मन में पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे के प्रति कोई शिकायत या नाराजगी नहीं है। आष्टीकर ने कहा कि पार्टी नेतृत्व की ओर से उन पर और अन्य सांसदों पर जताए गए अविश्वास तथा इस्तेमाल की गई कठोर भाषा ने उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया।
इस बीच पार्टी में बगावत की चर्चाओं के बीच शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र भर में कार्यकर्ताओं से संवाद अभियान शुरू करने का फैसला किया है। इस अभियान के तहत वे उन लोकसभा क्षेत्रों का भी दौरा करेंगे, जिनका प्रतिनिधित्व बागी सांसद कर रहे हैं।
राज्यसभा सांसद संजय राउत द्वारा साझा कार्यक्रम के अनुसार उद्धव ठाकरे 27 जून को यवतमाल से अपने दौरे की शुरुआत करेंगे। इसके बाद वे विदर्भ क्षेत्र के वाशिम और मराठवाड़ा क्षेत्र के हिंगोली का दौरा करेंगे। 28 जून को उनका कार्यक्रम परभणी और धाराशिव में रहेगा, जबकि 29 जून को वे शिर्डी पहुंचेंगे।
दूसरी ओर पार्टी ने नागेश पाटिल आष्टीकर के पुत्र कृष्णा नागेश पाटिल (आष्टीकर) को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया है। इस संबंध में राज्यसभा सांसद संजय राउत ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि कृष्णा नागेश पाटिल (आष्टीकर) को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) से निष्कासित किया गया है।
नागेश पाटिल आष्टीकर ने फेसबुक पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि इन दिनों उनके बारे में काफी चर्चा और अटकलें लगाई जा रही है इसलिए उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी व्यक्तिगत शिकायत के कारण पार्टी नहीं छोड़ी। उनके अनुसार उद्धव साहेब ने हमेशा उन्हें स्नेह दिया है। संजय राउत और अन्य वरिष्ठ नेताओं को उनके बारे में कुछ भी कहने का अधिकार है और वे सभी उनके लिए पिता तुल्य हैं।
उन्होंने कहा कि 18 जून तक उन्होंने और अन्य सांसदों ने कोई अलग रास्ता नहीं अपनाया था, लेकिन उन पर जताए गए अविश्वास और उनके खिलाफ इस्तेमाल की गई बेहद कठोर भाषा के कारण आपसी चर्चा शुरू हुई। लंबे विचार-विमर्श के बाद उन्हें लगा कि ऐसी स्थिति में पार्टी में बने रहने का कोई औचित्य नहीं रह गया है।
गौरतलब है कि 18 जून को आयोजित शिवसेना (यूबीटी) संसदीय दल की बैठक में यवतमाल-वाशिम से सांसद संजय देशमुख, हिंगोली से सांसद नागेश पाटिल आष्टीकर, परभणी से सांसद संजय जाधव, शिर्डी से सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे, मुंबई उत्तर-पूर्व से सांसद संजय दीना पाटिल और उस्मानाबाद से सांसद ओमप्रकाश राजे निंबालकर शामिल नहीं हुए थे। इसी घटना के बाद पार्टी के भीतर असंतोष और बगावत की चर्चाओं ने जोर पकड़ा।
'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चाओं के बीच आष्टीकर ने यह भी कहा कि अपने लोकसभा क्षेत्र हिंगोली के विकास के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता न मिलना भी उनके फैसले का एक बड़ा कारण रहा। उन्होंने कहा कि सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (एमपीलैड) के तहत मिलने वाली 5 करोड़ रुपये की राशि क्षेत्र की जरूरतों के मुकाबले बहुत कम है।
उन्होंने कहा कि उनके निर्वाचन क्षेत्र के लोगों ने उनसे अनेक उम्मीदें लगाई हैं और विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता होती है। नगर पंचायतों, जिला परिषदों और वन विभाग जैसी संस्थाओं के माध्यम से मिलने वाली विकास निधियों का लाभ विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों को पर्याप्त रूप से नहीं मिल पाता। क्षेत्र के विकास को ध्यान में रखते हुए उन्होंने और अन्य साथियों ने यह निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग उनके तर्क से सहमत होंगे और कुछ नहीं, लेकिन जो उनकी बातों का वास्तविक अर्थ समझेंगे, वे उनके निर्णय की वजह भी समझ जाएंगे।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि उद्धव ठाकरे गुट के नौ लोकसभा सांसदों में से छह सांसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। उधर शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने बागी नेताओं पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि उन्होंने अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धताओं की तुलना में व्यक्तिगत स्वार्थ और लालच को अधिक महत्व दिया है।