इस्लामाबाद : पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भारत के साथ जल सुरक्षा को लेकर युद्ध की धमकी दी है। हालांकि यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान खुद गंभीर जल संकट और घरेलू स्तर पर जल प्रबंधन की समस्याओं से जूझ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि देश में पानी की कमी के पीछे बड़ी वजह संसाधनों का सही प्रबंधन नहीं होना है।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने शनिवार को एआरवाई न्यूज से बातचीत में कहा कि अगर उन्हें लगता है कि उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा, जिसमें पानी भी शामिल है, को खतरा पहुंच रहा है तो पाकिस्तान भारत के खिलाफ युद्ध करने से पीछे नहीं हटेगा।
ख्वाजा आसिफ ने यह भी दावा किया कि अगर पाकिस्तान को इस बात के सबूत मिलते हैं कि भारत पानी की आपूर्ति को प्रभावित करने के लिए "खतरनाक गति" से कदम उठा रहा है, तो सैन्य कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है।
सिंधु जल संधि निलंबन के बाद बढ़ा विवाद
पाकिस्तानी मंत्री का यह बयान अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत की ओर से 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित करने के फैसले के बाद आया है। इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी।
भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के ढांचे को खत्म करने के लिए ठोस और विश्वसनीय कदम नहीं उठाता, तब तक यह संधि निलंबित रहेगी।
विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई इस संधि के तहत ऐतिहासिक रूप से पाकिस्तान को सिंधु नदी बेसिन के करीब 80 प्रतिशत पानी के इस्तेमाल का अधिकार मिला हुआ था, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से कृषि के लिए किया जाता है। लेकिन मौजूदा समय में पाकिस्तान के सामने जल प्रबंधन की बड़ी चुनौती बनी हुई है।
भारत पर आरोप, लेकिन पाकिस्तान के अंदर ही जल संकट गहराया
ख्वाजा आसिफ ने भारत पर पानी को "हथियार" के रूप में इस्तेमाल करने, चिनाब नदी के प्रवाह को प्रभावित करने और जरूरी आंकड़े साझा नहीं करने का आरोप लगाया।
हालांकि उनके दावों पर उस समय सवाल उठे जब उन्होंने यह स्वीकार किया कि पाकिस्तान की टीमों ने पहले करीब 115 निरीक्षण किए थे, लेकिन पिछले एक साल में हुई गतिविधियों की उन्हें मौजूदा जानकारी नहीं है।
वहीं पाकिस्तान के अंदर जल संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। खासकर सिंध और बलूचिस्तान जैसे क्षेत्रों में इसका बड़ा असर देखने को मिल रहा है।
सिंध और बलूचिस्तान में पानी की भारी कमी
सिंध सिंचाई विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पाकिस्तान की जल व्यवस्था में गंभीर कमी दिखाई दे रही है। नॉर्थ वेस्ट कैनाल में 64.1 प्रतिशत पानी की कमी दर्ज की गई है। वहीं राइस कैनाल में 38 प्रतिशत और दादू कैनाल में 82 प्रतिशत तक पानी की कमी सामने आई है।
महत्वपूर्ण सुक्कुर बैराज में भी पानी का स्तर लगातार गिर रहा है। स्थानीय नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर राज्य आंतरिक जल वितरण विवादों को हल नहीं कर पाया तो इसका असर अर्थव्यवस्था पर गंभीर रूप से पड़ेगा।