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AIFF के OCI फुटबॉलर नियम पर ISL क्लबों का विरोध, ईस्ट बंगाल और मोहन बागान को छोड़कर बाकी टीमें नाराज

2027-28 सीजन से लागू हो सकता है नया नियम, आर्थिक बोझ और नियमों की स्पष्टता बनी चुनौती।

कोलकाता : अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) की ओर से विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के फुटबॉलरों (OCI) को लेकर प्रस्तावित नए नियम पर इंडियन सुपर लीग (ISL) के ज्यादातर क्लबों में असंतोष बढ़ गया है। सूत्रों के मुताबिक कोलकाता की दो प्रमुख टीमों ईस्ट बंगाल और मोहन बागान सुपर जायंट को छोड़कर लगभग सभी क्लब इस प्रस्ताव का विरोध करने की तैयारी में हैं।

AIFF ने 20 जून को हुई विशेष आम सभा की बैठक में OCI फुटबॉलरों को लेकर एक नई व्यवस्था का प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव के बाद क्लबों के बीच इसे लागू करने को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

क्या है AIFF का प्रस्ताव?

मौजूदा नियमों के अनुसार ISL क्लब अपनी टीम में अधिकतम 6 विदेशी फुटबॉलर रख सकते हैं। इनमें से एक समय पर 4 विदेशी खिलाड़ियों को मैदान पर उतारने की अनुमति होती है।

लेकिन AIFF के नए प्रस्ताव के अनुसार किसी भी क्लब की शुरुआती प्लेइंग इलेवन में 3 विदेशी खिलाड़ी और 1 OCI फुटबॉलर को शामिल किया जा सकेगा।

इस प्रस्ताव को लेकर क्लबों की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही है। हालांकि ज्यादातर क्लबों का कहना है कि OCI खिलाड़ियों को शामिल करने के लिए जरूरी नियम, पंजीकरण प्रक्रिया और उनकी पात्रता को लेकर अभी तक स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। ऐसे में क्लबों के सामने अनिश्चितता बनी हुई है।

वेतन व्यवस्था को लेकर भी क्लबों की चिंता

क्लबों की परेशानी सिर्फ नियमों की अस्पष्टता तक सीमित नहीं है। कई ISL टीमें सीमित बजट में अपना संचालन कर रही हैं। ऐसे में OCI खिलाड़ियों को शामिल करने के लिए अगर अधिक वेतन देना पड़ा तो मौजूदा वेतन ढांचे पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।

क्लबों को डर है कि इससे भविष्य में उनकी आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है।

इस मामले से जुड़े एक सूत्र ने पहले बताया था कि ऐसे खिलाड़ियों के लिए कम से कम एक सीजन भारत में खेलना एक व्यावहारिक रास्ता हो सकता है। इस नियम को किस तरह लागू किया जाए, इस पर क्लब आपस में चर्चा करेंगे।

भारतीय मूल के खिलाड़ियों की सूची बनाने की तैयारी

सूत्रों के अनुसार अगर भारतीय मूल के 1 या 2 खिलाड़ियों को टीमों में शामिल किया जाता है तो संभावित रूप से 25 से 28 खिलाड़ियों की एक सूची तैयार की जा सकती है।

इसी तरह AIFF भी अपनी एक सूची तैयार करेगा, ताकि भविष्य में इन खिलाड़ियों के भारत की राष्ट्रीय टीम के लिए खेलने की संभावनाओं पर विचार किया जा सके।

समाधान की संभावना अभी बरकरार

हालांकि क्लबों की आपत्तियों के बावजूद यह मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। माना जा रहा है कि अगर AIFF वेतन सीमा और अन्य नियमों को लेकर स्पष्ट रुख अपनाता है और इस व्यवस्था को 2027-28 सीजन से लागू करने का फैसला करता है, तो कई क्लब इस प्रस्ताव पर दोबारा विचार करने के लिए तैयार हो सकते हैं।

अगला ISL सीजन 4 सितंबर से शुरू होने वाला है और इसके लिए अब तीन महीने से भी कम समय बचा है। ऐसे में अब नजर इस बात पर है कि AIFF क्लबों की चिंताओं को किस तरह दूर करता है और भारतीय फुटबॉल में OCI खिलाड़ियों को लेकर क्या अंतिम फैसला लिया जाता है।

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