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दिघा स्पीड बोट हादसा में वाटर स्पोर्ट्स की सुरक्षा पर उठे सवाल, प्रशासन ने लगाई रोक

पहले भी हुए हादसों के बाद फिर सामने आई सुरक्षा व्यवस्था की कमी, नियमों के पालन पर उठे सवाल।

कोलकाता : पश्चिम बंगाल के लोकप्रिय पर्यटन स्थल दिघा में स्पीड बोट हादसे ने एक बार फिर समुद्री रोमांच से जुड़ी गतिविधियों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार (20 जून 2026) सुबह दिघा मोहाना थाना क्षेत्र के सी-हॉक घोलाघाट में स्पीड बोट की टक्कर से पूर्व बर्धमान के रहने वाले युवक शेख बापन की मौत हो गई। घटना के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए दिघा समुद्र में चलने वाली सभी तरह की वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों पर फिलहाल रोक लगा दी है।

दुर्घटना के बाद पूर्व मेदिनीपुर जिला प्रशासन ने जांच पूरी होने तक समुद्र में इस्तेमाल होने वाले एडवेंचर स्पोर्ट्स उपकरणों के संचालन पर अनिश्चितकालीन रोक लगाने का फैसला किया है। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा मानकों और नियमों की जांच के बाद ही इन गतिविधियों को दोबारा शुरू करने की अनुमति दी जाएगी।

हादसे ने फिर उठाए सुरक्षा पर सवाल

पिछले कुछ वर्षों में दिघा में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ी है। समुद्र तट, समुद्र स्नान, नए जगन्नाथ मंदिर, मनोरंजन पार्क और अन्य आकर्षणों के कारण यह जगह बंगाल के सबसे पसंदीदा पर्यटन स्थलों में शामिल हो गई है। लोग यहां दो-तीन दिन की छुट्टी बिताने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।

लेकिन पर्यटकों की बढ़ती संख्या के साथ समुद्री गतिविधियों से जुड़े हादसों में भी बढ़ोतरी की शिकायतें सामने आती रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन कई बार कार्रवाई की बात करता है, लेकिन कुछ दिनों बाद निगरानी पहले जैसी नहीं रह जाती।

पहले भी हो चुके हैं हादसे

साल 2022 में दिघा में पांच पर्यटकों को लेकर जा रही एक स्पीड बोट समुद्र के बीच खराब हो गई थी। इसके बाद पर्यटक काफी देर तक समुद्र में फंसे रहे थे। प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई कर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला था।

इसके बाद 26 अक्टूबर 2023 को एक स्पीड बोट की टक्कर से कोलकाता के एक पर्यटक घायल हो गए थे। हालांकि उनकी जान बच गई थी। लेकिन 20 जून 2026 को हुए हादसे में एक पर्यटक की मौत हो गई।

एडवेंचर स्पोर्ट्स की बढ़ती लोकप्रियता, लेकिन नियमों पर सवाल

दिघा में स्पीड बोट, बनाना बोट, पैरासेलिंग और स्पीड बाइक जैसी कई समुद्री रोमांच गतिविधियां संचालित की जाती हैं। इनका संचालन निजी कंपनियों के हाथों में है।

सवाल यह उठ रहा है कि क्या इन कंपनियों के पास सभी जरूरी अनुमति और वैध दस्तावेज मौजूद हैं? क्या सुरक्षा नियमों का सही तरीके से पालन किया जा रहा है? और क्या प्रशासन नियमित रूप से इन गतिविधियों की निगरानी करता है?

नियमों के अनुसार पर्यटन विभाग से अनुमति लेने के बाद दिघा-शंकरपुर विकास प्राधिकरण (डीएसडीए) से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) लेना जरूरी होता है। हालांकि आरोप है कि कई मामलों में इन नियमों की पूरी तरह जांच नहीं की जाती।

स्थानीय लोगों ने बताई समस्या

स्थानीय लोगों का कहना है कि समुद्र में हादसा होने के बाद कुछ समय के लिए प्रशासन सक्रिय हो जाता है, लेकिन बाद में हालात फिर पहले जैसे हो जाते हैं।

स्थानीय निवासी निताई दास और फोटोग्राफर अनीक मैती ने कहा कि वाटर राइड्स के लिए एक तय क्षेत्र होना चाहिए। उनका कहना है कि इन गतिविधियों को भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर चलाया जाना चाहिए, क्योंकि कई बार ये राइड्स लोगों के बीच पहुंच जाती हैं और बड़ा हादसा हो सकता है।

पुलिस और प्रशासन ने शुरू की जांच

2023 में स्पीड बोट हादसे के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी ने कहा था कि स्पीड बोट को केवल खाली जगहों पर चलाया जाना चाहिए और भीड़ वाले क्षेत्रों में इसकी अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने पर्यटकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही थी।

शनिवार की घटना को लेकर कांथी के अनुमंडल अधिकारी धूमल प्रतीक अशोक ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। वहीं पूर्व मेदिनीपुर के पुलिस अधीक्षक अंशुमान साहा ने जानकारी दी कि स्पीड बोट को जब्त कर लिया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और समुद्री क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई जा रही है।

रामनगर के विधायक चंद्रशेखर मंडल ने कहा कि उन्होंने सभी ऐसी राइड संचालित करने वाली कंपनियों की जानकारी मांगी है और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की जाएगी।

वहीं दिघा-शंकरपुर विकास प्राधिकरण के चेयरमैन और जिलाधिकारी निरंजन कुमार ने कहा कि संबंधित कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि जांच पूरी होने तक सभी गतिविधियां बंद रहेंगी और सभी पहलुओं की समीक्षा के बाद ही इन्हें दोबारा शुरू किया जाएगा।

हाल ही में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दिघा-शंकरपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ बैठक की थी। बैठक में दिघा को बेहतर पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने को लेकर कई फैसले लिए गए। प्रशासन का कहना है कि पर्यटकों की सुरक्षा को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाएगा और इसी दिशा में आगे कदम उठाए जाएंगे।

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