अहमदाबाद : गुजरात की अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने लंबे समय से फरार चल रहे कुख्यात गैंगस्टर मोहम्मद तस्लीम उर्फ मोहम्मद उमर शेख को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार तस्लीम 2019 में पैरोल के दौरान फरार हो गया था और तब से लगातार अपनी पहचान, ठिकाने और संपर्क के तरीके बदलकर गिरफ्तारी से बचता रहा। विशेष खुफिया सूचनाओं और व्यापक अभियान के बाद उसे राजस्थान से दबोचा गया।
क्राइम ब्रांच ने बताया कि मोहम्मद तस्लीम कुख्यात अपराधी अब्दुल लतीफ गैंग से जुड़ा रहा है और वह कई चर्चित आपराधिक मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है। वर्तमान में वह 1992 के राधिका जिमखाना सामूहिक हत्याकांड और पूर्व राज्यसभा सदस्य रऊफ वलीउल्लाह की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है।
पुलिस के मुताबिक 2019 में अस्थायी पैरोल पर बाहर आने के बाद तस्लीम फरार हो गया था। इसके बाद उसने कई राज्यों में लगातार अपने ठिकाने बदले और गिरफ्तारी से बचने के लिए अलग-अलग पहचान का इस्तेमाल किया। हाल ही में मिली खुफिया जानकारी और जमीनी स्तर पर जुटाए गए इनपुट के आधार पर क्राइम ब्रांच ने उसकी लोकेशन राजस्थान में चिन्हित की।
इसके बाद एक समन्वित रणनीतिक अभियान चलाकर उसे गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद उसे हिरासत में ले लिया गया है और उसे वापस साबरमती सेंट्रल जेल भेजने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
जांच एजेंसियों के अनुसार 1990 के दशक में गुजरात में गैंगवार के दौर के दौरान मोहम्मद तस्लीम, अंडरवर्ल्ड डॉन अब्दुल लतीफ के सबसे भरोसेमंद और खतरनाक शार्पशूटरों में से एक माना जाता था। उस समय वह गैंग के लिए कई हिंसक वारदातों में शामिल रहा।
तस्लीम का नाम 3 अगस्त 1992 को हुए चर्चित राधिका जिमखाना हत्याकांड में प्रमुख रूप से सामने आया था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वह एक भारी हथियारों से लैस हमलावर दल का हिस्सा था, जिसने अहमदाबाद के ओढव इलाके स्थित राधिका जिमखाना क्लब पर हमला किया था। इस हमले का उद्देश्य कथित प्रतिद्वंद्वी शराब तस्कर हंसराज त्रिवेदी को निशाना बनाना था।
हमलावरों ने स्वचालित हथियारों और एके-47 राइफलों से अंधाधुंध गोलियां चलाई थीं। इस हमले में नौ लोगों की मौत हुई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार यह गुजरात में गैंगवार के दौरान एके-47 के इस्तेमाल का पहला दर्ज मामला भी माना जाता है।
मोहम्मद तस्लीम को पूर्व राज्यसभा सदस्य और कांग्रेस नेता रऊफ वलीउल्लाह की हत्या के मामले में भी दोषी ठहराया गया था। अक्टूबर 1992 में दिनदहाड़े हुई इस हत्या में तस्लीम और उसके साथियों की भूमिका सामने आई थी।
जांच के अनुसार रऊफ वलीउल्लाह कथित तौर पर राधिका जिमखाना हत्याकांड में अब्दुल लतीफ गैंग की संलिप्तता को उजागर करने की कोशिश कर रहे थे। इसी वजह से उन्हें निशाना बनाया गया था।
क्राइम ब्रांच का कहना है कि यह गिरफ्तारी एक महत्वपूर्ण सफलता है। मामले से जुड़े सभी कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करते हुए आरोपी को फिर से जेल भेजने की प्रक्रिया जारी है।