नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक संगठित अंतरराज्यीय नवजात शिशु तस्करी गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने लंबे समय तक गुप्त निगरानी और विशेष अभियान चलाकर पांच नवजात शिशुओं को सुरक्षित मुक्त कराया है। मामले में एक चिकित्सक, दलाल, तस्कर, बिचौलियों और संभावित खरीदारों समेत कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय था और नवजात बच्चों की अवैध खरीद-फरोख्त में शामिल था।
पुलिस के अनुसार अब तक बचाए गए पांचों नवजात शिशुओं की उम्र 5 दिन से लेकर 4 महीने के बीच है। सभी बच्चों को सुरक्षित संरक्षण में रखा गया है। साथ ही उनके वास्तविक परिवारों या वैध अभिभावकों की पहचान और तलाश की जा रही है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस गिरोह के माध्यम से नवजात लड़कों को 6 से 8 लाख रुपये तक और नवजात लड़कियों को 3 से 4 लाख रुपये तक में बेचा जाता था। आरोप है कि सौदे को पक्का करने के लिए खरीदारों से पहले ही ‘टोकन मनी’ भी वसूली जाती थी। बच्चों को चुनने के लिए कथित तौर पर खरीदारों को विकल्प भी उपलब्ध कराए जाते थे।
जांचकर्ताओं के मुताबिक यह अंतरराज्यीय नेटवर्क मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को निशाना बनाता था। आरोप है कि राजस्थान और गुजरात के विभिन्न इलाकों से नवजात बच्चों को हासिल कर उन्हें दिल्ली-एनसीआर और आसपास के राज्यों में संतान की इच्छा रखने वाले दंपतियों तक पहुंचाया जाता था।
पूरे मामले का खुलासा दिल्ली के एक सतर्क नागरिक की सूचना के आधार पर हुआ। पुलिस सूत्रों के अनुसार, उस व्यक्ति ने पहाड़गंज इलाके में एक महिला को एक बच्चे के साथ देखा था। कुछ दिनों बाद उसी महिला को किसी दूसरे बच्चे के साथ देखने पर उसे संदेह हुआ। इसके बाद उसने पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने लगभग 15 दिनों तक निगरानी की और अंततः पूरे गिरोह का पता लगाने में सफलता हासिल की।
तफ्तीश में यह भी सामने आया है कि गिरोह नवजात बच्चों को संभावित खरीदारों तक पहुंचाने के लिए फर्जी दस्तावेज, जाली चिकित्सा रिकॉर्ड और झूठी पहचान का इस्तेमाल करता था। आरोप है कि कुछ मामलों में नकली गर्भावस्था की कहानी गढ़ी जाती थी और अस्पतालों के दस्तावेजों का भी दुरुपयोग किया जाता था।
मामले की जांच के दायरे में एक अस्पताल और उससे जुड़े एक चिकित्सक की भूमिका भी शामिल है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस अवैध गतिविधि में चिकित्सा संस्थानों का कितना सहयोग या इस्तेमाल किया गया।
प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि यह गिरोह केवल दिल्ली तक सीमित नहीं था, बल्कि कई राज्यों में इसका नेटवर्क फैला हुआ था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि पिछले कुछ वर्षों में इस नेटवर्क के जरिए कितने बच्चों की तस्करी की गई।
कुछ प्रारंभिक रिपोर्टों में आशंका जताई गई है कि इस गिरोह के माध्यम से करीब 30 बच्चों की तस्करी की गई हो सकती है। इस संबंध में कई दंपतियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है और पुलिस संभावित खरीदारों की पहचान करने में जुटी हुई है।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। गिरफ्तार किए गए 13 आरोपियों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि आगे की जांच में इस गिरोह के संचालन और इसके विस्तार से जुड़े कई और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।