तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी को इन दिनों पहले के मुकाबले कुछ ज्यादा दिल्ली और कोलकाता के बीच आवाजाही करनी पड़ रही है। इसके लिए वह एम्ब्रायर ERJ जेट विमान का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी विमान में सवार होकर वह शुक्रवार (19 जून) को दिल्ली से कोलकाता एयरपोर्ट पर पहुंचे। क्या आप जानते हैं इस विमान का प्रति घंटा खर्च कितना है?
करीब 7 लाख रुपए। पिछले लंबे समय से ही वह इस जेट विमान का इस्तेमाल कर रहे हैं। 13 सीटर इस विमान में सवारियों की संख्या होती है कभी 2 तो कभी 3। कोलकाता से दिल्ली के बीच आवाजाही करने के लिए 5 घंटे का किराया करीब 35 लाख रुपए के आसपास चुकाना पड़ता है।
सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि यह खर्च पार्टी फंड से ही चुकाया जाता था। जब तक तृणमूल सत्ता में थी, तब तक चार्टर्ड फ्लाइट से उनकी आवाजाही पर न तो कोई रोक-टोक थी और न ही कभी किसी ने सवाल उठाया था। या यूं कहें, किसी के मन में अगर सवाल उठा भी हो तो पूछने की 'हिम्मत' नहीं हुई थी। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है।
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पार्टी के कई बड़े नेताओं ने तृणमूल छोड़कर दूसरी पार्टी का हाथ थाम लिया है। बड़ी संख्या में नेताओं को विभिन्न घोटालों के मामलों में गिरफ्तार किया जा चुका है। ऐसी स्थिति में पार्टी के एक प्रमुख नेता (अभिषेक बनर्जी) को एक दिन के लिए दिल्ली जाने का ₹35 लाख रुपए का खर्च अगर पार्टी फंड से किया जाए तो सवाल उठना ही स्वाभाविक है।
पार्टी के प्रवक्ता कुणाल घोष ने इस बाबत अपनी आपत्ति जतायी है। इस बारे में जब 19 जून को दिल्ली में अभिषेक बनर्जी से मीडिया कर्मियों ने सवाल किया तो उन्होंने स्पष्ट रूप से जवाब देते हुए कहा था कि अगर वे लोग लिखित शिकायत दर्ज करवाते हैं तो अभिषेक बनर्जी इकोनॉमी क्लास से ही आवाजाही करेगा।
मेरी बगल वाली सीट पर अगर कोई बैठता है, यह मेरे साथ कई बार हो चुका है। मेरे वकीलों के कहने पर ही ऐसा (चार्टर्ड विमान से आवाजाही) किया गया था। कुणाल घोष मेरे सहकर्मी हैं। अगर वह मेरे खिलाफ कुछ कहते हैं तो भी मैं उनके खिलाफ कुछ नहीं कहूंगा।
पार्टी के नेताओं का कहना है कि इकोनॉमी क्लास से सफर के दौरान अभिषेक बनर्जी के पास वाली सीट पर कई बार अपरिचित व्यक्ति बैठते थे। इसलिए उनके वकीलों ने उनसे ऐसा करने से मना किया था।
वहीं इस बारे में विरोधी पार्टी के नेता ऋतब्रत बंद्योपाध्याय ने कहा कि हमारी लड़ाई चार्टर्ड फ्लाइट के खिलाफ है। पार्टी के 500 से अधिक कार्यकर्ता पीड़ित हैं। मामला लड़ने का रुपए नहीं है। लोग गहने गिरवी रखकर मामला लड़ रहे हैं। पार्टी के कई नेताओं का दावा है कि एक दिन में कोलकाता से दिल्ली जाने का खर्च ₹10 हजार और आने-जाने का कुल खर्च ₹20 हजार होगा। अगर थोड़ा अधिक आराम से आवाजाही करना चाहते हैं तो बिजनेस क्लास से आवाजाही में खर्च ₹70 से ₹90 हजार के बीच होगा। लेकिन उसकी जगह पर ₹35 लाख!
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अगर संघर्ष और उम्र के बारे में सोच कर ममता बनर्जी चार्टर्ड फ्लाइट से आवाजाही करती, तब भी उसे मान लिया जाता। लेकिन 38 साल का एक नौजवान अगर चाहे तो बिजनेस क्लास में दिल्ली जा ही सकता है। ऐसा भी नहीं है कि उन्हें किसी ऐसे शहर से दिल्ली जाना पड़ रहा हो जहां के लिए डाइरेक्ट फ्लाइट नहीं मिलती है।
दिनभर में कोलकाता से दिल्ली की कई फ्लाइट्स आती-जाती हैं। एयरपोर्ट पर जाकर टिकट खरीदकर फ्लाइट में चढ़ा जा सकता है। लेकिन वह सामान्य गाड़ी किराए पर लेने की तरह चार्टर्ड फ्लाइट किराए पर लेकर दिल्ली जाते हैं।
पार्टी की ओर से सवाल उठाया जा रहा है कि ऐसी कौन सी कानूनी बाध्यता है जिसके कारण उन्हें चार्टर्ड फ्लाइट से आवाजाही करनी पड़ती है। विदेशों के दौरे पर तो वह सामान्य विमान से ही जाते हैं, बिजनेस अथवा फर्स्ट क्लास। तो फिर अपने देश में वह किराए पर विमान क्यों लेते हैं।
कुणाल घोष का कहना है कि पार्टी की ऐसी हालत है और ऐसी स्थिति में विमान के किराए के लिए इतना खर्च करना पड़ रहा है। इसके पक्ष में कोई भी दलील नहीं दे पा रहे हैं। यह देखने में भी बहुत बुरा लग रहा है। पार्टी के लोग कह रहे हैं कि उन्हें ऐसा करने से मना करने के लिए कहे। लेकिन किसे मना करें? क्या वह किसी की मनाही सुनते हैं?