नई दिल्लीः पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) निवेशकों की सुरक्षा और विज्ञापन नियमों में एकरूपता लाने के लिए नया ढांचा तैयार कर रहा है। इसके तहत शेयर ब्रोकर, म्यूचुअल फंड हाउस, निवेश सलाहकार और पोर्टफोलियो प्रबंधक जैसी सेबी (SEBI) नियंत्रित संस्थाओं को अपने ब्रांड या कॉरपोरेट पहचान के प्रचार के लिए सेलिब्रिटी का उपयोग करने की अनुमति दी जा सकती है।
हालांकि प्रस्तावित व्यवस्था में किसी भी सेलिब्रिटी को किसी विशेष निवेश उत्पाद या सेवा का समर्थन करने की अनुमति नहीं होगी। सेबी (SEBI) ने इस संबंध में साझा परामर्श पत्र (कंसल्टेशन पेपर) जारी कर आम लोगों और बाजार सहभागियों से सुझाव मांगे हैं।
ब्रांड प्रचार तक सीमित रहेगी सेलिब्रिटी की भूमिका
प्रस्ताव के अनुसार, सेलिब्रिटी केवल कंपनी या ब्रांड की छवि को बढ़ावा देने के लिए विज्ञापनों में शामिल हो सकेंगे। इसके लिए निर्धारित शर्तों और आवश्यक डिस्क्लेमर का पालन करना होगा। लेकिन किसी विशेष निवेश योजना, वित्तीय उत्पाद या निवेश सेवा का प्रचार-प्रसार उनके जरिए नहीं कराया जा सकेगा।
वर्तमान में परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों (AMC) को उद्योग स्तर पर सेबी की पूर्व अनुमति के साथ सेलिब्रिटी प्रचार की सीमित अनुमति प्राप्त है।
पूर्व मंजूरी की जगह बाद में निगरानी
सेबी (SEBI) ने शेयर ब्रोकरों, ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म प्रदाताओं (OBPP), निवेश सलाहकारों और रिसर्च विश्लेषकों के विज्ञापनों के लिए पूर्व मंजूरी की मौजूदा व्यवस्था को समाप्त करने का भी प्रस्ताव दिया है।
नई व्यवस्था लागू होने पर विज्ञापन जारी होने के 24 घंटे के भीतर संबंधित स्टॉक एक्सचेंज या सेबी द्वारा मान्यता प्राप्त पर्यवेक्षी संस्था को इसकी सूचना देनी होगी। इसके बाद विज्ञापनों की निगरानी और जांच की जाएगी।
नियामक का मानना है कि डिजिटल दौर में संस्थाएं प्रतिदिन बड़ी संख्या में सोशल मीडिया पोस्ट, शैक्षणिक वीडियो और प्रचार सामग्री जारी करती हैं। ऐसे में हर सामग्री के लिए पहले अनुमति लेना व्यवहारिक नहीं है और इससे समय-संवेदनशील सामग्री की उपयोगिता भी प्रभावित होती है।
कई मंजूरियों की बाध्यता खत्म करने की तैयारी
सेबी (SEBI) ने कहा कि कई संस्थाएं एक से अधिक भूमिकाओं में पंजीकृत होती हैं। उदाहरण के लिए कोई शेयर ब्रोकर ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म प्रदाता भी हो सकता है। ऐसी स्थिति में उसे विभिन्न एक्सचेंजों और नियामकीय दिशानिर्देशों के तहत एक ही विज्ञापन के लिए अलग-अलग मंजूरियां लेनी पड़ती हैं, जिससे संचालन संबंधी जटिलताएं बढ़ती हैं। प्रस्तावित कॉमन एडवर्टाइजमेंट कोड (CAC) इस समस्या को दूर करने की दिशा में कदम माना जा रहा है।
विज्ञापनों में रेटिंग और रैंकिंग के उपयोग का भी प्रस्ताव
सेबी (SEBI) ने यह भी सुझाव दिया है कि विज्ञापनों में रेटिंग या रैंकिंग का उपयोग किया जा सके, बशर्ते उन्हें पास्ट रिस्क एंड रिटर्न वेरिफिकेशन एजेंसी (PARRVA) द्वारा जारी किया गया हो।
ऐसी एजेंसियां उद्योग संगठनों के साथ मिलकर रेटिंग और रैंकिंग की पद्धति तय करेंगी। रैंकिंग व्यापक अध्ययन और सर्वेक्षण पर आधारित होनी चाहिए ताकि विभिन्न संस्थाओं के बीच निष्पक्ष तुलना संभव हो सके।
विज्ञापन में उपयोग की गई रेटिंग की कार्यप्रणाली का खुलासा करना होगा या फिर संबंधित पोर्टल अथवा वेबसाइट का लिंक उपलब्ध कराना होगा। साथ ही यह स्पष्ट करना होगा कि निवेश निर्णय लेते समय केवल रेटिंग या रैंकिंग को ही आधार नहीं माना जाना चाहिए।
डिजिटल विज्ञापनों के लिए अलग प्रावधान
एसएमएस, पॉप-अप और पुश नोटिफिकेशन जैसे सीमित स्थान वाले डिजिटल माध्यमों के लिए संक्षिप्त खुलासे (डिस्क्लोजर) की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि ऐसे मामलों में निवेशकों को पूरी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए हाइपरलिंक देना अनिवार्य होगा।
शैक्षणिक सामग्री रहेगी दायरे से बाहर
सेबी ने स्पष्ट किया है कि केवल निवेशक जागरूकता या शैक्षणिक उद्देश्य से तैयार की गई सामग्री, जिसमें किसी उत्पाद या सेवा के प्रचार का उद्देश्य न हो, उसे विज्ञापन संहिता के दायरे से बाहर रखा जाएगा।
इसके अलावा नियामक ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सहित सभी संस्थाओं को विज्ञापनों में तथाकथित "डार्क पैटर्न" यानी भ्रामक डिजिटल तकनीकों के इस्तेमाल से बचने का सुझाव दिया है।
एक समान नियमों पर जोर
प्रस्तावित कॉमन एडवर्टाइजमेंट कोड का उद्देश्य विभिन्न श्रेणियों की सेबी-नियंत्रित संस्थाओं के लिए अलग-अलग विज्ञापन नियमों को समाप्त कर एक व्यापक और एकीकृत व्यवस्था लागू करना है। यह ढांचा शेयर ब्रोकर, डिपॉजिटरी प्रतिभागी, निवेश सलाहकार, रिसर्च विश्लेषक, ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म प्रदाता, पोर्टफोलियो प्रबंधक, म्यूचुअल फंड और एसेट मैनेजमेंट कंपनियों पर लागू होगा।
सेबी (SEBI) का कहना है कि इससे कारोबार करने में आसानी बढ़ेगी, अनुपालन संबंधी बोझ कम होगा, तकनीक आधारित निगरानी मजबूत होगी और निवेशकों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। नियामक ने इस प्रस्ताव पर 14 जुलाई तक आम जनता और बाजार सहभागियों से सुझाव आमंत्रित किए हैं।